मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ड्यूटी-फ्री शॉप्स पर अप्रूव्ड न होने वाले निकोटीन पाउच बेचे जा रहे हैं। Adani Group की एक ज्वाइंट वेंचर कंपनी इस मामले में रेगुलेटर के फैसले को मुंबई हाई कोर्ट में चुनौती दे रही है।
मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ड्यूटी-फ्री आउटलेट्स पर निकोटीन पाउच की बिक्री को लेकर एक कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। अथॉरिटीज को इन प्रोडक्ट्स की बिक्री पर आपत्ति है, क्योंकि ये भारतीय ड्रग और कॉस्मेटिक्स रेगुलेशन के तहत अप्रूव्ड नहीं हैं। एयरपोर्ट पर ये स्टोर्स मुंबई ट्रेवल रिटेल द्वारा चलाए जा रहे हैं, जो Adani Group और दुबई की Flemingo के बीच एक ज्वाइंट वेंचर है।
रेगुलेटरी जांच और खुलासे
एक एंटी-निकोटीन एडवोकेसी ग्रुप की शिकायतों के बाद, ड्रग कंट्रोल अथॉरिटीज ने मार्च में इन दुकानों का निरीक्षण किया था। अधिकारियों को पता चला कि इंपोर्टेड निकोटीन पाउच डिपार्चर लाउंज में बिना जरूरी रजिस्ट्रेशन या इंपोर्ट लाइसेंस के बेचे जा रहे थे। असिस्टेंट ड्रग्स कंट्रोलर के एक लेटर में यह निष्कर्ष निकाला गया कि ये आइटम 'ड्रग' की परिभाषा में आते हैं, जिसके लिए कड़े रेगुलेटरी अप्रूवल की जरूरत होती है। इसके बाद, ऑपरेटर को जरूरी अप्रूवल मिलने तक बिक्री रोकने का निर्देश दिया गया।
कानूनी पक्ष
मुंबई ट्रेवल रिटेल ने रेगुलेटर के इस क्लासिफिकेशन को चुनौती दी है। कंपनी का लीगल डिफेंस यह तर्क दे रहा है कि ड्यूटी-फ्री जोन डोमेस्टिक कस्टम्स फ्रंटियर के बाहर काम करते हैं, इसलिए डोमेस्टिक ड्रग लॉज इन ऑपरेशंस पर लागू नहीं होने चाहिए। इसके अलावा, कंपनी का कहना है कि ये पाउच एक नई प्रोडक्ट कैटेगरी हैं जो मौजूदा टोबैको कंट्रोल लेजिस्लेशन के तहत स्पष्ट रूप से कवर नहीं होती हैं। यह मामला फिलहाल मुंबई हाई कोर्ट में है।
प्रवर्तन की स्थिति
मुंबई हाई कोर्ट ने कानूनी समीक्षा लंबित रहने तक निकोटीन पाउच के मौजूदा स्टॉक के खिलाफ किसी भी प्रवर्तन कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि फिलहाल, रेगुलेटर मौजूदा स्टॉक को जब्त करने या उसकी बिक्री रोकने के लिए तत्काल कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। इस केस का नतीजा काफी अहम है, क्योंकि यह भारत के अन्य ड्यूटी-फ्री जोन में इसी तरह के निकोटीन प्रोडक्ट्स की बिक्री के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।
निवेशक मुंबई हाई कोर्ट की कार्यवाही पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि कंपनी के खिलाफ अंतिम फैसला आने पर इन प्रोडक्ट्स को ड्यूटी-फ्री शॉप्स से स्थायी रूप से हटाया जा सकता है। इसका व्यापक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कोर्ट इंटरनेशनल ट्रांजिट एरिया में बेचे जाने वाले प्रोडक्ट्स पर रेगुलेटर के अधिकार को बरकरार रखता है या नहीं, जो एयरपोर्ट जोन में रिटेल ऑपरेटर्स के लिए प्रोडक्ट मिक्स और संभावित रेवेन्यू स्ट्रीम को प्रभावित कर सकता है।
