Meta के 26 पूर्व कर्मचारियों ने AI टूल्स के ज़रिए हालिया छंटनी में विकलांग (disabled) कर्मचारियों को अनुचित तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए एक फेडरल मुकदमा दायर किया है। उनका दावा है कि इन सिस्टम्स ने मेडिकल लीव लेने वाले स्टाफ को दंडित किया, हालांकि Meta ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यह केस कॉर्पोरेट फैसलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है।
Meta के खिलाफ 26 पूर्व कर्मचारियों का मुकदमा
Meta Platforms Inc. एक बड़े कानूनी पचड़े में फंस गई है। कैलिफोर्निया के ओकलैंड में 26 पूर्व कर्मचारियों ने कंपनी के खिलाफ एक फेडरल मुकदमा दायर किया है। इन कर्मचारियों का आरोप है कि Meta ने हालिया छंटनी के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके विकलांग (disabled) और मेडिकल कंडीशन वाले कर्मचारियों को गलत तरीके से निशाना बनाया। शिकायत में कहा गया है कि Meta के इंटरनल इवैल्यूएशन सिस्टम्स ने उन कर्मचारियों को नुकसान पहुंचाया जो मेडिकल लीव पर थे, गर्भवती थीं, या किसी अन्य डिसेबिलिटी का प्रबंधन कर रही थीं। यह मुकदमा उन टर्मिनेशन फैसलों को चुनौती देता है, जिनकी सूचना मई 2026 में दी गई थी और जो 22 जुलाई 2026 से प्रभावी होने वाली थी।
AI परफॉरमेंस का गणित?
इस विवाद का मुख्य बिंदु AI-असिस्टेड सॉफ्टवेयर का कथित इस्तेमाल है, जिसका उपयोग प्रोडक्टिविटी मेट्रिक्स के आधार पर कर्मचारियों को स्कोर और रैंक करने के लिए किया गया था। शिकायत के अनुसार, Metamate जैसे इंटरनल लार्ज लैंग्वेज मॉडल असिस्टेंट का इस्तेमाल कम्युनिकेशन्स और डॉक्यूमेंट्स को ट्रैक करने के लिए किया गया। इसके अलावा, कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि कंपनी ने प्रोडक्टिविटी स्कोर निर्धारित करने के लिए कीस्ट्रोक्स, स्क्रीन एक्टिविटी, ईमेल और ब्राउज़र हिस्ट्री जैसे डेटा पॉइंट्स को ट्रैक किया। वादी का तर्क है कि ये मेट्रिक्स उन व्यक्तियों को दंडित करते हैं जो वैध मेडिकल या परिवार-संबंधित कारणों से काम से अनुपस्थित थे, जिससे प्रभावी रूप से संरक्षित समूहों के खिलाफ पक्षपात हुआ।
Meta का जवाब और कानूनी पक्ष
Meta ने पूर्व कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोपों का पुरजोर खंडन किया है। कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा कि Meta में वर्कफोर्स मैनेजमेंट और संगठनात्मक निर्णय AI सिस्टम द्वारा नहीं, बल्कि लोगों द्वारा लिए जाते हैं। कंपनी का कहना है कि छंटनी की प्रक्रिया में AI ने कोई भूमिका नहीं निभाई है और उसने मुकदमे में उल्लिखित विशिष्ट इंटरनल सॉफ्टवेयर टूल्स के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है। चूंकि यह मामला वर्तमान में कानूनी प्रक्रिया के शुरुआती चरणों में है, कंपनी का बचाव संभवतः इस बात पर केंद्रित होगा कि क्या इन मानव-केंद्रित निर्णयों को वादियों द्वारा वर्णित स्वचालित प्रणालियों से प्रभावित किया गया था।
वर्कप्लेस में AI के लिए मायने
यह कानूनी चुनौती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रोजगार संबंधी निर्णयों में AI के उपयोग को लेकर किसी बड़ी टेक फर्म को लक्षित करने वाले अपने तरह के पहले मामलों में से एक बताई जा रही है। जैसे-जैसे वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियां अपने ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करने और प्रोडक्टिविटी की निगरानी के लिए AI टूल्स को तेजी से एकीकृत कर रही हैं, इस केस का नतीजा परफॉरमेंस इवैल्यूएशन और वर्कफोर्स रीस्ट्रक्चरिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इन टूल्स के उपयोग के लिए एक कानूनी मिसाल कायम कर सकता है।
वादियों का तर्क है कि Meta ने अपने AI सिस्टम्स में संभावित पक्षपात के लिए परीक्षण करने में विफल रही, जो उनका मानना है कि कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क के कुछ राज्य कानूनों के तहत एक आवश्यकता है। जबकि कंपनी अपने व्यापक पुनर्गठन प्रयासों को जारी रखे हुए है, निवेशक और बाजार पर्यवेक्षक स्थिति की निगरानी कर रहे हैं कि यह मुकदमा कॉर्पोरेट गवर्नेंस में AI के उपयोग से संबंधित भविष्य के नियामक ढांचे को कैसे प्रभावित कर सकता है। अगले प्रमुख घटनाक्रमों में बर्खास्तगी पर रोक लगाने के अनुरोध के संबंध में अदालत की सुनवाई और Meta के इंटरनल प्रोडक्टिविटी टूल्स के कार्य और कार्यान्वयन के संबंध में दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले किसी भी बाद के सबूत शामिल होंगे।
