Meru Cabs ने अब Ola और Uber के खिलाफ अपनी 7 साल पुरानी कानूनी लड़ाई को खत्म करने का फैसला किया है। कंपनी ने NCLAT (नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल) को बताया है कि संसाधनों की कमी और परिचालन संबंधी कठिनाइयों के चलते वे इस केस को आगे नहीं बढ़ा सकते।
मामला क्या था?
यह केस 2017 में शुरू हुआ था जब Meru Cabs ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) में Ola और Uber के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। Meru का आरोप था कि ये दोनों कंपनियां अपनी भारी-भरकम फंडिंग का इस्तेमाल करके भारी छूट और ड्राइवर इंसेंटिव दे रही हैं, जो कि गलत तरीके से बाजार पर कब्जा जमाने की कोशिश है। Meru का दावा था कि इन कंपनियों ने सिर्फ भारत में ड्राइवर इंसेंटिव पर लगभग ₹13,000 करोड़ खर्च किए थे।
CCI ने केस क्यों खारिज किया?
2018 में, CCI ने इन आरोपों को शुरू में ही खारिज कर दिया था। कमीशन का कहना था कि ड्राइवरों को इंसेंटिव और ग्राहकों को छूट देना अपने आप में एंटी-कंपटीटिव (प्रतिस्पर्धा-विरोधी) नहीं है। रेगुलेटर ने यह भी माना कि ड्राइवर और ग्राहक दोनों के पास अलग-अलग ऐप इस्तेमाल करने की आजादी है, और कोई भी प्लेटफॉर्म किसी को बांधकर नहीं रख सकता। इसलिए, CCI को प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन का कोई सबूत नहीं मिला।
क्यों वापस लिया केस?
अब Meru Cabs ने NCLAT में केस वापस लेने की अर्जी दी है। कंपनी का कहना है कि वे अब इस कानूनी लड़ाई को जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं। ट्रिब्यूनल ने बिना किसी शर्त के केस वापस लेने की इजाजत दे दी है, जिसका मतलब है कि CCI का पिछला फैसला ही अंतिम रहेगा।
बाजार पर क्या असर होगा?
इस केस के वापस लेने से भारतीय राइड-हेलिंग मार्केट में एक बड़ा कानूनी अड़चन दूर हो गया है। यह इस बात का संकेत है कि ऐप-आधारित कैब एग्रीगेटर्स ने बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। पुरानी टैक्सी कंपनियों के लिए यह एक झटका है, जिन्हें हमेशा से यह चिंता रही है कि वेंचर कैपिटल से समर्थित बड़ी कंपनियां उन्हें कीमत के मामले में टक्कर नहीं देने देंगी।
