संपत्ति योजना हुई सबकी पहुंच में
महाराष्ट्र सरकार ने वसीयत (Will) रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए इसकी फीस को घटाकर मात्र ₹100 कर दिया है। यह एक बड़ा कदम है जो यह बताता है कि वसीयत सिर्फ अमीरों के लिए नहीं है। जानकारों का कहना है कि जिनके पास सेविंग अकाउंट, प्रॉपर्टी या कोई इन्वेस्टमेंट है, उन्हें भी वसीयत बनवाने पर विचार करना चाहिए। भारत में फॉर्मल एस्टेट प्लानिंग (Estate Planning) की दर काफी कम है, अनुमान है कि केवल 2-10% भारतीय ही वसीयत बनवाते हैं। इस लापरवाही के कारण 80% से ज़्यादा सिविल केस विरासत और प्रॉपर्टी के झगड़ों से जुड़े हैं, जो सालों तक चलते हैं और कीमती समय व संसाधन बर्बाद करते हैं। सरकार की इस नई पहल का मकसद स्टाम्प ड्यूटी और वकीलों की अनिवार्य उपस्थिति को हटाकर, इसे ज़्यादा लोगों के लिए सुलभ बनाना है।
बाज़ार के लिए बड़ा मौका
भारत का वेल्थ मैनेजमेंट (Wealth Management) मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है, और इसमें एस्टेट प्लानिंग एक अहम हिस्सा बनकर उभर रहा है। एंड-ऑफ-लाइफ प्लानिंग मार्केट 2030 तक USD 2,820.2 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें एस्टेट प्लानिंग सेवाओं का बड़ा योगदान होगा। वेल्थ मैनेजर्स (Wealth Managers) हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNWIs) और अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (UHNWIs) से मज़बूत मांग की उम्मीद कर रहे हैं, जो अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखना चाहते हैं और आने वाली पीढ़ियों को सौंपना चाहते हैं। महाराष्ट्र में फीस को ₹100 तक लाने से वह छुपी हुई मांग (latent demand) सामने आ सकती है जो पहले फीस और जटिलता के डर से रुकी हुई थी। हालांकि भारत में वसीयत पर स्टाम्प ड्यूटी से छूट है, लेकिन महाराष्ट्र में प्रक्रिया का सरलीकरण और न्यूनतम फीस इसे अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बना सकती है।
चुनौतियाँ भी कम नहीं
एस्टेट प्लानिंग (Estate Planning) को सुगम बनाने के बावजूद, संपत्ति के निर्विवाद हस्तांतरण का रास्ता अभी भी मुश्किल हो सकता है। वसीयत लिखने में अस्पष्टता, गलत तरीके से एग्जीक्यूट (execute) होना, स्पष्ट बेनिफिशियरी (beneficiary) का नाम न होना, या जीवन की बड़ी घटनाओं के बाद वसीयत को अपडेट न करना, ये सब कानूनी झमेलों का कारण बन सकते हैं। हाथ से लिखी वसीयत भी सही ढंग से एग्जीक्यूट होने पर वैध मानी जाती है, लेकिन इसे वसीयतकर्ता की क्षमता, अनुचित प्रभाव या जालसाजी के आधार पर चुनौती दी जा सकती है। रजिस्ट्रेशन करवाना वसीयत की प्रामाणिकता बढ़ाने और चुनौतियों को रोकने में मदद करता है, लेकिन रजिस्टर्ड वसीयतों को भी कानूनी आधार पर चुनौती दी जा सकती है। वसीयत बनाने वालों की कम दर (2-10%) यह बताती है कि सिर्फ फीस कम करने से शायद ही तुरंत सांस्कृतिक झिझक या मृत्यु और विरासत से जुड़े भावनात्मक मुद्दों पर बात करने की मुश्किलों को दूर किया जा सके। इसके अलावा, जटिल वित्तीय साधनों और वैश्विक संपत्ति के बढ़ने के कारण, एक साधारण वसीयत पर्याप्त नहीं हो सकती। इसलिए, कई अमीर परिवार संपत्ति की सुरक्षा और टैक्स के बेहतर प्रबंधन के लिए प्राइवेट ट्रस्ट्स (Private Trusts) का विकल्प चुन रहे हैं।
भविष्य की राह
महाराष्ट्र का यह अनोखा कदम देश भर में एस्टेट प्लानिंग को बढ़ावा देने के लिए एक ब्लूप्रिंट (blueprint) का काम कर सकता है। भारत की बढ़ती संपन्नता और धन संचय की जटिलता को देखते हुए, यह समय की मांग है कि लोग अपनी विरासत की योजना सक्रिय रूप से बनाएं। फाइनेंशियल एडवाइजरी फर्म (Financial Advisory Firms) अब अपनी वेल्थ मैनेजमेंट सेवाओं में एस्टेट प्लानिंग को शामिल कर रही हैं, इसे सिर्फ एक कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि संपत्ति प्रबंधन का एक रणनीतिक हिस्सा मान रही हैं। इसका दीर्घकालिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह नीति कितने लोगों को वसीयत बनवाने के लिए प्रेरित करती है, और क्या यह एस्टेट प्लानिंग को एक सीमित कानूनी सेवा से निकालकर आम लोगों के व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन का अभिन्न अंग बना पाती है।
