TVK वकील चयन में रिश्वतखोरी का मामला: मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
TVK वकील चयन में रिश्वतखोरी का मामला: मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर

एक प्रैक्टिस कर रहीं वकील ने मद्रास हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने विल्लुपुरम में सरकारी वकीलों के चयन प्रक्रिया में कथित तौर पर रिश्वतखोरी और अनियमितताओं का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि पदों के लिए अवैध भुगतान मांगे गए और उन्होंने इस कानूनी चुनौती में वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं को भी प्रतिवादी बनाया है।

क्या हुआ?

विल्लुपुरम जिले में सरकारी वकीलों के चयन को लेकर मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता, एम. ज्ञानसुंदरी, जो कि एक प्रैक्टिस कर रहीं वकील हैं और सत्ताधारी तमिलनाडु वेत्री कज़गम (TVK) पार्टी की सदस्य भी हैं, ने नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और रिश्वतखोरी का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि चयन प्रक्रिया से छेड़छाड़ की गई और कथित तौर पर अलग-अलग पदों के लिए ₹5 लाख से ₹30 लाख तक की अवैध रकम मांगी गई।

क्या हैं आरोप?

याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ज्ञानसुंदरी का आरोप है कि चुने गए उम्मीदवारों की एक सूची 29 जून को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर साझा की गई थी, जो आवेदन की आधिकारिक अंतिम तिथि समाप्त होने से कई घंटे पहले की बात है। उन्होंने दावा किया कि महिला न्यायालय विशेष लोक अभियोजक (Mahila Court Special Public Prosecutor) और अतिरिक्त लोक अभियोजक (Additional Public Prosecutor) के पदों के लिए उनके खुद के आवेदन को ठीक से स्वीकार नहीं किया गया। उनका तर्क है कि चयन प्रक्रिया आधिकारिक कट-ऑफ से पहले ही अंतिम रूप ले चुकी थी, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।

किन पर दर्ज हुई याचिका?

इस याचिका में तमिलनाडु विधि विभाग (Tamil Nadu Law Department) और विल्लुपुरम जिला कलेक्टर (Villupuram District Collector) सहित कई प्रमुख लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने TVK पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C Joseph Vijay), महासचिव एन. आनंद (N Anandh), और विल्लुपुरम जिला सचिव एन. मोहनराज (N Mohanraj) शामिल हैं, का नाम भी लिया है। याचिकाकर्ता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री के सार्वजनिक रुख का हवाला देते हुए इस प्रक्रिया को चुनौती दी है और तर्क दिया है कि रिपोर्ट की गई अनियमितताएं शासन के इन घोषित सिद्धांतों को कमजोर करती हैं।

क्या मांगी गई है राहत?

याचिकाकर्ता ने मद्रास हाई कोर्ट से हस्तक्षेप करने और संबंधित अधिकारियों को उन्हें चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, उन्होंने 5 जून की सरकारी वकील नियुक्तियों की अधिसूचना से संबंधित किसी भी आगे की कार्यवाही पर तब तक रोक लगाने के लिए एक अंतरिम रोक (interim injunction) की भी मांग की है, जब तक कि अदालत आरोपों की योग्यता की समीक्षा नहीं कर लेती। यह मामला अब अदालत के समक्ष लंबित है, जो प्रक्रियात्मक उल्लंघन और भ्रष्टाचार के दावों का मूल्यांकन करेगी।

आगे क्या देखना होगा?

निगरानी रखने वालों के लिए मुख्य फोकस इस बात पर रहेगा कि अदालत अंतरिम रोक के अनुरोध पर क्या फैसला सुनाती है। यदि अदालत रोक लगाती है, तो इस क्षेत्र में सरकारी वकीलों की वर्तमान भर्ती प्रक्रिया को आगे की जांच लंबित रहने तक निलंबित किया जा सकता है। भविष्य के घटनाक्रम राज्य सरकार और नामित राजनीतिक हस्तियों द्वारा दायर किए गए जवाबों के साथ-साथ चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेंगे।

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