कोर्ट में पूर्व जज की जमानत पर सुनवाई
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी कर उनसे अग्रिम जमानत के खिलाफ दायर याचिकाओं पर जवाब मांगा है। यह जमानत उनकी बहू, ट्विशा शर्मा, की दहेज हत्या के मामले में दी गई थी और अब इसकी कड़ी जांच हो रही है। भोपाल की एक अदालत ने 15 मई को सिंह, 63, को गिरफ्तारी से राहत दी थी। उस आदेश में कहा गया था कि मुख्य आरोप ट्विशा शर्मा के पति, समर्थ सिंह, पर हैं, और सिंह की पूर्व न्यायिक भूमिका का भी जिक्र किया गया था।
जल्दबाजी में जमानत और सबूतों पर चिंता
राज्य की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्थिति की तात्कालिकता पर जोर दिया और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई। मेहता ने तर्क दिया कि जमानत बहुत जल्दी और तथ्यों की गहन समीक्षा के बिना दी गई थी। उन्होंने मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया।
दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का आदेश, पति ने वापस ली जमानत याचिका
न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह ने अगली सुनवाई 25 मई तय की है। इस बीच, ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह ने हाई कोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस ले ली। कोर्ट ने ट्विशा के लिए दूसरी पोस्टमार्टम जांच का भी आदेश दिया है, जो नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की एक विशेष टीम करेगी। यह मांग शर्मा के परिवार ने की थी, जिन्होंने अपने ससुराल वालों पर घरेलू हिंसा और उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
मामले का विवरण और पारिवारिक आरोप
नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा ने लगभग पांच महीने पहले भोपाल के वकील समर्थ सिंह से शादी की थी। वे एक डेटिंग ऐप के जरिए मिले थे। शर्मा के परिवार ने सीधे तौर पर उनके ससुराल वालों पर मौत में शामिल होने का आरोप लगाया है, और उत्पीड़न का इतिहास बताया है। कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन ने शर्मा के पति और सास के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के संबंध में एक फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) दर्ज की है।
कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्य जुटाना
हालांकि इस मामले में वित्तीय डेटा शामिल नहीं है, लेकिन जमानत का तेजी से दिया जाना और उसके बाद मिली चुनौती यह दर्शाती है कि निचली अदालत ने विस्तृत समीक्षा नहीं की होगी। इस तरह की कानूनी चुनौतियों से अक्सर सबूतों और प्रारंभिक फैसले से जुड़े हालात की अधिक जांच होती है। AIIMS द्वारा दूसरी पोस्टमार्टम की मांग मौत का निश्चित कारण स्थापित करने के उद्देश्य से की गई है, जो मामले में शामिल सभी व्यक्तियों के खिलाफ केस को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है।
