एडमिशन प्रक्रिया पर सवाल
MNLU नागपुर पर आरोप है कि उसने 2025 PhD एडमिशन के लिए निर्धारित आरक्षण कोटे का पालन नहीं किया। यूनिवर्सिटी का कहना है कि योग्य उम्मीदवार नहीं मिले, लेकिन दस्तावेजों से पता चलता है कि बिना किसी सूचना के अनारक्षित सीटों को बढ़ा दिया गया। इस मामले में एक लीगल केस भी फाइल हुआ है, जिसके बाद नियामक संस्थाओं का शिकंजा कस गया है।
नियमों की अनदेखी का आरोप
यूनिवर्सिटी के लिए यह मामला गंभीर बनता जा रहा है। एक तरफ यूनिवर्सिटी का दावा है कि वह सभी नियमों का पालन कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ 2025 PhD के लिए एडमिशन की जो सूची सामने आई है, उसमें कई गड़बड़ियां दिखी हैं। खासकर, अनारक्षित कैटेगरी में 20 सीटें भरी गईं, जबकि मूल रूप से यह 12 सीटों के लिए ही तय थी। वहीं, आरक्षित कैटेगरी की कई सीटें खाली रह गईं।
क्या है पूरा मामला?
यूनिवर्सिटी के दस्तावेजों के अनुसार, 35 सीटों के प्लान में OBC, SC, SEBC और अन्य जनजातियों के लिए कोटा तय था। लेकिन अनारक्षित सीटों का बढ़ना यह दिखाता है कि सीटों को भरने के लिए नियमों से खिलवाड़ किया गया। यूनिवर्सिटी ने कथित तौर पर आरक्षित उम्मीदवारों के लिए 50% की अनिवार्यता को भी हटा दिया, जो कि एक गुप्त फैसला था।
यूनिवर्सिटी पर बढ़ता कानूनी दबाव
इस पूरे मामले से MNLU नागपुर की प्रतिष्ठा को बड़ा झटका लगा है। नागपुर बेंच ऑफ बॉम्बे हाई कोर्ट में केस चलने के अलावा, यूनिवर्सिटी को भविष्य में फंडिंग और मान्यता मिलने में भी दिक्कतें आ सकती हैं। वाइस चांसलर का यह कहना कि उन्हें नियामक नोटिस की जानकारी नहीं थी, यह एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम में कम्युनिकेशन गैप या अस्थिरता की ओर इशारा करता है। जब कोई संस्थान एडमिशन के नियमों में गुप्त बदलाव करता है, तो यह न केवल दीपक नमदेव खरात जैसे उम्मीदवारों को कोर्ट जाने पर मजबूर करता है, बल्कि सरकारी संस्थाओं को भी जांच के दायरे में लाता है।
आगे क्या हो सकता है?
जैसे-जैसे NCSC की जांच आगे बढ़ेगी, यूनिवर्सिटी को अपने दावों और हकीकत के बीच के अंतर को समझाना होगा। हाई कोर्ट या NCSC के आदेश पर 2025 के एडमिशन प्रोसेस की पूरी जांच हो सकती है। ऐसे में यूनिवर्सिटी को या तो अतिरिक्त सीटें देनी पड़ सकती हैं या फिर एडमिशन कमेटी को बदलना पड़ सकता है। यह मामला भविष्य में स्पेशलाइज्ड यूनिवर्सिटीज के लिए एक मिसाल बनेगा कि कैसे वे अकादमिक स्वतंत्रता और सरकारी नियमों का संतुलन बनाए रखें।
