लोहागढ़ फोर्ट मर्डर केस में नया मोड़ आ गया है। आरोपी सिया गोयल की तरफ से वकील नियुक्त करने को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने आरोपी के भाई को ₹10 करोड़ का लीगल नोटिस भेजा है, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।
क्या हुआ?
लोहागढ़ फोर्ट मर्डर केस में एक नया कानूनी पेंच फंस गया है। पूरा मामला आरोपी, 20 वर्षीय सिया गोयल, की तरफ से कौन सा वकील केस लड़ेगा, इसको लेकर है। दो वकील, एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव और एडवोकेट विपुल दुशिंग, दोनों ही यह दावा कर रहे हैं कि उन्हें सिया गोयल का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया है।
यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने आरोपी के भाई साहिल गोयल को ₹10 करोड़ का एक लीगल नोटिस भेजा। नोटिस में साहिल गोयल पर वकील की नियुक्ति को लेकर झूठे और मानहानिकारक बयान देने का आरोप लगाया गया है, जिससे श्रीवास्तव की पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचा है।
कानूनी दावों में टकराव
इस विवाद में वकीलों की नियुक्ति को लेकर दो अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव का कहना है कि उन्हें और उनकी टीम को 25 जून को सिया गोयल द्वारा वकालतनामा (Vakalatnama) पर हस्ताक्षर के माध्यम से औपचारिक रूप से नियुक्त किया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन दस्तावेजों को बॉम्बे हाईकोर्ट समेत कई न्यायिक अधिकारियों द्वारा स्वीकार किया जा चुका है।
इसके विपरीत, एडवोकेट विपुल दुशिंग का कहना है कि उन्हें आरोपी के परिवार ने हायर किया है। दुशिंग के मुताबिक, 29 जून को हुई एक रिमांड सुनवाई (Remand Hearing) के दौरान, सिया गोयल ने मजिस्ट्रेट को बताया था कि उन्होंने केवल उन्हें ही अपना वकील नियुक्त किया है। प्रतिनिधित्व के इन विरोधाभासी दावों ने बचाव पक्ष की टीम की कानूनी स्थिति को अनिश्चित बना दिया है।
मानहानि का नोटिस
₹10 करोड़ का यह लीगल नोटिस साहिल गोयल द्वारा 29 जून को दिए गए एक बयान के जवाब में भेजा गया है। इस बयान में साहिल गोयल ने सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि उनके परिवार ने एडवोकेट श्रीवास्तव को नियुक्त नहीं किया है। श्रीवास्तव ने इस बयान को कानूनी बिरादरी में अपनी प्रतिष्ठा पर हमला बताया है। उन्होंने साहिल गोयल से माफी मांगने और इस मामले पर एक औपचारिक स्पष्टीकरण देने की मांग की है। श्रीवास्तव ने इस बात पर भी जोर दिया कि सिया गोयल एक वयस्क हैं और उन्हें स्वतंत्र रूप से अपने वकील को चुनने का पूरा अधिकार है।
मामले की वर्तमान स्थिति
यह मामला पुणे के रियल एस्टेट डेवलपर केतन अग्रवाल की मौत से जुड़ा है, जिनकी कथित तौर पर 18 जून को लोहागढ़ फोर्ट से गिरने के बाद मौत हो गई थी। वर्तमान में इस मामले की जांच लोनावला ग्रामीण पुलिस कर रही है। यह मामला पुणे के वडगांव मावल में मजिस्ट्रेट कोर्ट में विचाराधीन है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही, मामले की आगे की कार्यवाही प्रभावी ढंग से हो सके, इससे पहले अदालत के लिए अधिकृत कानूनी प्रतिनिधित्व के सवाल का समाधान करना एक महत्वपूर्ण बिंदु बना हुआ है।
