Kohinoor Foods Share Price: बुरी खबर! ऑडिट में 'Qualified', CFO का इस्तीफा, **₹926 Cr** का बड़ा झटका

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AuthorAditya Rao|Published at:
Kohinoor Foods Share Price: बुरी खबर! ऑडिट में 'Qualified', CFO का इस्तीफा, **₹926 Cr** का बड़ा झटका
Overview

Kohinoor Foods के शेयरधारकों के लिए बुरी खबर है। कंपनी के तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजों के साथ ही ऑडिटर ने **'Qualified Conclusion'** जारी किया है। इसके अलावा, कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) ने इस्तीफा दे दिया है और कंपनी पर **₹926 करोड़** का भारी-भरकम DRT आदेश आ गया है।

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नतीजों के साथ 'Qualified' ऑडिट का साया

Kohinoor Foods Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही और नौ महीनों के लिए अन-ऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इन अवधियों के लिए विशिष्ट वित्तीय आंकड़े (जैसे रेवेन्यू, नेट प्रॉफिट, ईपीएस) उपलब्ध कराए गए टेक्स्ट में नहीं दिए गए हैं।

ऑडिट में क्या है दिक्कत?

कंपनी के वैधानिक ऑडिटर (Statutory Auditors) ने वित्तीय नतीजों पर 'Qualified Conclusion' जारी किया है। यह मुख्य रूप से इसलिए है क्योंकि कंपनी ने NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) के रूप में वर्गीकृत बैंक लोन पर ₹3780.72 लाख (तिमाही के लिए) और ₹83514.80 लाख (साल-दर-तारीख) ब्याज देने का प्रावधान नहीं किया है। साथ ही, रद्द की गई कॉर्पोरेट गारंटी पर भी ₹80.90 लाख (तिमाही के लिए) और ₹1443.94 लाख (साल-दर-तारीख) ब्याज का प्रावधान नहीं किया गया है। इसके अलावा, बैंकों के साथ सामंजस्य (reconciliation) की भी कमी पाई गई है।

'Going Concern' पर प्रबंधन का भरोसा

कंपनी ने अपने कर्जदाताओं के साथ एक 'वन टाइम सेटलमेंट' (OTS) किया है, जिसके तहत ₹227.45 करोड़ की पूरी रकम ब्याज सहित जमा कर दी गई है। इसके अलावा, कंपनी की राइस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को ₹190.00 करोड़ में बेचा गया है, जिसके लिए खरीदार ने पूरी राशि जमा कर दी है, हालांकि बिक्री विलेख (sale deed) अभी पंजीकृत होना बाकी है। प्रबंधन का मानना ​​है कि इस संशोधित OTS और संपत्ति की बिक्री के आधार पर कंपनी एक 'गोइंग कंसर्न' (यानी, भविष्य में भी चलते रहने की क्षमता) बनी हुई है।

कानूनी पचड़ों और कर्ज का अंबार

Kohinoor Foods कई गंभीर कानूनी और नियामक चुनौतियों का सामना कर रही है:

  • DRT कार्यवाही: जून 2020 के एक आदेश ने कंपनी की गिरवी रखी गई संपत्तियों और अचल संपत्तियों के हस्तांतरण या निपटान पर रोक लगा दी थी। एक लीड बैंक की याचिका के बाद, 28 अक्टूबर, 2025 को DRT ने INR 926.13 करोड़ का भुगतान 30 दिनों के भीतर करने का आदेश दिया है, अन्यथा संपत्तियों की बिक्री से वसूली की जाएगी।
  • IBC मामले: प्रमुख लेनदारों (PNB और IDBI Bank) ने NCLT चंडीगढ़ में इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 7 के तहत याचिकाएं दायर की हैं, जिनकी सुनवाई 20 अप्रैल, 2026 को निर्धारित है। हालांकि, PNB याचिका के संबंध में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
  • वारंट और कुर्की: एक विक्रेता ने एग्जीक्यूशन पिटीशन दायर की, जिसके बाद कंपनी की तीनों संपत्तियों की कुर्की का वारंट जारी हुआ। सूरजकुंड संपत्ति और एक PNB बैंक खाते को कुर्क भी किया गया। दिल्ली हाई कोर्ट ने अवार्ड पर रोक लगा दी थी, लेकिन फरीदाबाद कोर्ट ने PNB खाते से कुर्की हटाने का आदेश दिया। कंपनी फरीदाबाद की इन कार्यवाहियों को चुनौती दे रही है।
  • SEBI का नोटिस: कंपनी और उसके डायरेक्टर्स को SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने शो-कॉज नोटिस जारी किया है, जिसके लिए सेटलमेंट एप्लीकेशन दायर की गई है और जवाब सबमिट किया गया है।
  • अन्य देनदारियां: इनकम टैक्स और GST अथॉरिटीज की मांगों और MSME लेनदारों को विलंबित भुगतानों पर ब्याज का प्रावधान नहीं किया गया है।

नेतृत्व में बदलाव

इन सब के बीच, कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO), श्री प्रदीप गोस्वामी ने इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह श्री प्रभात कुमार को नया CFO नियुक्त किया गया है।

जोखिम और आगे का रास्ता

'Qualified Audit' का निष्कर्ष और DRT, IBC, एग्जीक्यूशन, SEBI जैसे कई लंबित कानूनी मामले कंपनी के लिए बड़े जोखिम पैदा करते हैं। कंपनी का भविष्य काफी हद तक OTS और संपत्ति की बिक्री को सफलतापूर्वक पूरा करने और इन कानूनी बाधाओं से पार पाने की क्षमता पर निर्भर करेगा। प्रबंधन द्वारा 'गोइंग कंसर्न' माने जाने के बावजूद, कंपनी की स्थिति काफी नाजुक लगती है। निवेशकों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.