ED अधिकारी पर रिश्वतखोरी की जांच राज्य एजेंसी ही करेगी
केरल हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक अधिकारी के खिलाफ चल रही रिश्वतखोरी की जांच को राज्य की विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) के पास ही रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को ट्रांसफर करने की मांग को खारिज कर दिया है।
जांच पूरी करने के लिए 90 दिन की समय सीमा
कोर्ट ने VACB को इस जांच को अगले 90 दिनों के भीतर पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि कोर्ट राज्य स्तर पर निगरानी को प्राथमिकता दे रहा है और प्रक्रिया को तेज करना चाहता है, बजाय इसके कि मामला लंबी केंद्रीय जांच में उलझे। यह फैसला बिजनेसमैन अनीश बाबू से जुड़े मामले में आया है।
केस का संदर्भ: मनी लॉन्ड्रिंग जांच में रिश्वतखोरी के आरोप
यह जांच असल में काजू आयात धोखाधड़ी मामले से जुड़ी रिश्वतखोरी के आरोपों से संबंधित है, जिसकी शुरुआत 2026 की शुरुआत में हुई थी। बिजनेसमैन ने आरोप लगाया था कि ED के एक अधिकारी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच को रफा-दफा करने के बदले रिश्वत मांगी थी। कोर्ट का यह फैसला इस सिद्धांत को रेखांकित करता है कि मौजूदा, विधिवत पंजीकृत राज्य जांच तब तक जारी रहेगी जब तक कि अक्षमता या दुर्भावना का स्पष्ट प्रमाण न हो।
ED की जांच पर संभावित असर
अगर VACB को ED अधिकारी के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों में दम मिलता है, तो यह बिजनेसमैन के खिलाफ ED की व्यापक मनी लॉन्ड्रिंग जांच की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से चुनौती दे सकता है। इसके विपरीत, अगर राज्य एजेंसी अधिकारी द्वारा किसी गलत काम का पता नहीं लगा पाती है, तो बिजनेसमैन को आगे कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। VACB की 90-दिवसीय जांच के परिणाम से सभी पक्षों के लिए मुकदमे के अगले चरणों को प्रभावित करने की उम्मीद है।
