केरल हाई कोर्ट (Kerala High Court) ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि हाल ही में हुई कलडी भूस्खलन (Kalladi landslide) के पीड़ितों को तत्काल मुआवज़ा (ex-gratia) दिया जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि घायलों के इलाज का खर्च टनल प्रोजेक्ट (tunnel project) को उठाना होगा, जबकि मरे हुए लोगों के शवों को जल्द से जल्द उनके घर पहुंचाने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
केरल हाई कोर्ट (Kerala High Court) ने शुक्रवार को राज्य सरकार को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि Wayanad में हाल ही में हुए भूस्खलन के पीड़ितों को तुरंत वित्तीय सहायता (financial assistance) और चिकित्सा सहायता (medical support) दी जाए। यह घटना 7 जुलाई को Anakkompoyil Meppadi टनल प्रोजेक्ट (tunnel project) के पास हुई थी। जस्टिस AK Jayasankaran Nambiar और जस्टिस Preeta AK की डिविजन बेंच इस मामले की खुद निगरानी कर रही है।
मुआवज़े और इलाज पर कोर्ट का फरमान
कोर्ट की मुख्य चिंता प्रभावित परिवारों और ज़िंदा बचे लोगों को तुरंत राहत पहुंचाना है। जस्टिस नंबियार और जस्टिस प्रीता AK ने स्पष्ट आदेश दिया है कि राज्य सरकार जल्द से जल्द मुआवज़े की रकम का भुगतान करे ताकि परिवार इस अचानक आई मुसीबत का सामना कर सकें। घायलों के इलाज के संबंध में, कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि उनका इलाज बिना किसी आर्थिक बोझ के किया जाना चाहिए। बेंच ने यह भी साफ किया कि इन मरीजों के अस्पताल और इलाज का खर्च शुरुआत में टनल प्रोजेक्ट के खाते से उठाया जाएगा, और बाद में पैसे की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रियाएं तय की जाएंगी।
जवाबदेही और जारी बचाव कार्य
केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) ने कोर्ट को बताया कि मुश्किल इलाकों में भारी मशीनरी और मानवीय प्रयासों से लापता लोगों की तलाश जारी है। कोर्ट ने भूस्खलन के समय टनल प्रोजेक्ट की परिचालन स्थिति (operational status) की विस्तृत जांच की मांग की है। KSDMA ने यह भी बताया कि प्रोजेक्ट का बाहरी काम 5 जुलाई को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया था, लेकिन कोर्ट ने भूस्खलन के समय श्रमिकों की गतिविधियों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है।
इसके अलावा, एमिकास क्यूरी (amicus curiae) ने टनल साइट से निकाली गई मिट्टी के प्रबंधन और भारी मानसून बारिश के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई। अब राज्य सरकार को 17 जुलाई तक एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) सौंपनी होगी, जिसमें मुआवज़ा भुगतान की स्थिति, घायलों के इलाज की प्रगति और मृतकों के शवों को वापस भेजने की प्रक्रिया शामिल होगी। कोर्ट इस मामले की साप्ताहिक निगरानी करेगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पुनर्वास के प्रयास सही दिशा में चल रहे हैं।
