केरल हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि जेल में बंद BJP पार्षद सुगाथन आर, 14 जुलाई को जेल के अंदर ही अपनी शपथ ग्रहण सेरेमनी पूरी कर सकते हैं। यह फैसला थिरुवनंतपुरम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर उनके अधिकार का सम्मान करता है।
जेल में ही होगी शपथ ग्रहण सेरेमनी
केरल हाई कोर्ट ने बीजेपी पार्षद सुगाथन आर को निवारक हिरासत (preventive detention) में रहते हुए ही अपनी पद की शपथ लेने की अनुमति दे दी है। यह समारोह 14 जुलाई को सुबह 11 बजे जेल परिसर के अंदर ही आयोजित किया जाएगा। कोर्ट के इस आदेश से यह सुनिश्चित होता है कि पार्षद अपनी निवारक हिरासत के बावजूद थिरुवनंतपुरम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में अपने चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए कानूनी आवश्यकता को पूरा कर सकेंगे। यह आदेश उन्हें केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट, जिसे KAAPA के नाम से भी जाना जाता है, के तहत हिरासत में होने के बावजूद यह अधिकार देता है।
मतदाताओं के फैसले का सम्मान
जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन, जिन्होंने इस मामले की सुनवाई की, ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाताओं के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। कोर्ट ने माना कि सुगाथन को उनके कानूनी इतिहास के बावजूद जनता ने चुना है, और उनकी हिरासत उनके निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा नहीं बननी चाहिए। यह हस्तक्षेप 24 जून के एक पिछले हाई कोर्ट के फैसले के बाद आया है, जिसमें कई पार्षदों द्वारा ली गई शपथ को अमान्य घोषित कर दिया गया था। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि उन्होंने केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट, 1994 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय देवताओं या राजनीतिक आंदोलनों के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी। अन्य पार्षदों ने फिर से शपथ लेकर इसे ठीक कर लिया है, लेकिन सुगाथन की हिरासत के कारण वे ऐसा नहीं कर पाए थे जब तक कि यह विशेष आदेश जारी नहीं किया गया।
पारदर्शिता और मीडिया की पहुंच
हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि मान्यता प्राप्त मीडिया कर्मियों को जेल के अंदर शपथ ग्रहण समारोह को देखने की अनुमति दी जाएगी। इस निर्देश का उद्देश्य प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है, और कोर्ट ने निर्वाचित अधिकारियों से जुड़े कार्यवाही के बारे में सार्वजनिक जागरूकता के महत्व पर भी प्रकाश डाला। यह निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि यह प्रक्रिया नागरिकों के प्रति खुली और जवाबदेह बनी रहे।
कानूनी पक्ष और सरकारी दलील
सुनवाई के दौरान, महाधिवक्ता (Director General of Prosecution) ने सुगाथन की KAAPA के तहत निवारक हिरासत की प्रकृति का हवाला देते हुए इस अनुरोध का विरोध किया था। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि ऐसी हिरासत सामान्य गिरफ्तारियों की तुलना में सामान्य अधिकारों को सीमित करती है। हालांकि, हाई कोर्ट ने प्रतिनिधित्व के लोकतांत्रिक सिद्धांत को प्राथमिकता दी और संवैधानिक प्रक्रिया में बाधा डालने की अनुमति देने के बजाय शपथ की सुविधा प्रदान करने का फैसला किया। पार्षद के लिए अगला कदम इस शपथ को औपचारिक रूप से पूरा करना है, जो स्थानीय नगरपालिका निकाय के सदस्य के रूप में कानूनी रूप से कार्य करने के लिए एक अनिवार्य शर्त है।
