केरल कोर्ट का बड़ा फैसला: TDB के फाइनेंस में बड़ा बदलाव, कोर्ट ने दिए सख्त आदेश!

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AuthorNeha Patil|Published at:
केरल कोर्ट का बड़ा फैसला: TDB के फाइनेंस में बड़ा बदलाव, कोर्ट ने दिए सख्त आदेश!
Overview

केरल हाई कोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के फाइनेंस और अकाउंटिंग सिस्टम में बड़े सुधार का आदेश दिया है। ऑडिट में सामने आई पारदर्शिता की गड़बड़ियों के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। इसके तहत TDB को अपना पूरा फाइनेंशियल सिस्टम कंप्यूटराइज्ड करना होगा, कंट्रोल मजबूत करने होंगे और स्टाफ को ट्रेनिंग देनी होगी।

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कोर्ट की नज़र में TDB का फाइनेंशियल मैनेजमेंट

त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) का फाइनेंशियल मैनेजमेंट अब कोर्ट की कड़ी निगरानी में है, जिसमें कई बड़ी समस्याएं सामने आई हैं। केरल हाई कोर्ट ने 'ग्लोबल अय्यप्पा संगमम' इवेंट के ऑडिट में ट्रांसपरेंसी (पारदर्शिता) की गंभीर कमी को देखते हुए इसके पूरे अकाउंटिंग सिस्टम को डिजिटाइज करने का आदेश दिया है। कोर्ट का मानना है कि बोर्ड में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।

कंप्यूटराइज्ड सिस्टम का आदेश

केरल हाई कोर्ट ने TDB को अपना पूरा फाइनेंशियल सिस्टम सेंट्रलाइज्ड और कंप्यूटराइज्ड करने का निर्देश दिया है। इस योजना में मौजूदा रिकॉर्ड्स की स्टैंडर्डाइजेशन और एक्यूरेसी चेक के साथ डेटा को नए सिस्टम में माइग्रेट करना भी शामिल है। यह बदलाव धीरे-धीरे लागू किया जाएगा, जिसकी शुरुआत कुछ चुनिंदा मंदिरों से होगी ताकि बोर्ड व्यावहारिक चुनौतियों का पता लगाकर उन्हें दूर कर सके। केरल की IT इन्फ्रास्ट्रक्चर एजेंसी KITFRA इस रिफॉर्म को मौजूदा डिजिटाइजेशन प्रोजेक्ट्स के साथ इंटीग्रेट करने में मदद करेगी।

ऑडिट में सामने आईं फाइनेंशियल मैनेजमेंट की खामियां

कोर्ट को सौंपी गई सबरीमाला स्पेशल कमिश्नर की रिपोर्ट में TDB के फाइनेंशियल मैनेजमेंट में बार-बार होने वाली दिक्कतों का खुलासा हुआ। इनमें अकाउंट्स फाइनल करने में देरी, खराब डॉक्यूमेंटेशन, एसेट्स और लायबिलिटीज की ट्रैकिंग में भारी कमी, खर्चों की गलत क्लासिफिकेशन और कुछ ट्रांज़ैक्शन्स को रिकॉर्ड न करना शामिल है। कैश अकाउंटिंग पर बहुत ज्यादा निर्भरता भी एक बड़ी समस्या रही है। इन कमियों के कारण बोर्ड के लिए अपनी सही फाइनेंशियल पोजीशन और देनदारियों का सही-सही आकलन करना मुश्किल हो रहा था। पिछले सालों की ऑडिट रिपोर्ट्स, जिनमें दशकों पुरानी सबरीमाला इम्प्रूवमेंट फंड की रिपोर्ट्स भी शामिल हैं, लगातार फाइनेंशियल गड़बड़ियों की ओर इशारा करती हैं। TDB ने पहले भी 'ग्लोबल अय्यप्पा संगमम' इवेंट के फाइनेंस में गड़बड़ियों को स्वीकार किया था।

पब्लिक ट्रस्ट और गवर्नेंस की चुनौतियां

त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड लगभग 3,000 मंदिरों का प्रबंधन करता है और इसके पास बड़ी मात्रा में फंड होता है। 2017-18 फाइनेंशियल ईयर में बोर्ड का खर्च ₹678 करोड़ और रेवेन्यू ₹683 करोड़ था। फाइनेंशियल मिसमैनेजमेंट और समय पर जरूरी फाइलिंग्स न होने जैसी समस्याएं पब्लिक ट्रस्ट और बोर्ड की इंटीग्रिटी पर सवाल खड़ी करती हैं। बोर्ड की असली फाइनेंशियल पोजीशन का पता न होना एक बड़ा गवर्नेंस फेलियर है। हालांकि कोर्ट का आदेश टेक्नोलॉजी अपग्रेड पर केंद्रित है, लेकिन असली चुनौती सभी संस्थानों में मजबूत फाइनेंशियल डिसिप्लिन और कंट्रोल लागू करना है। इन बदलावों को लागू करने में काफी लागत और जटिलता आएगी, इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी महत्वपूर्ण है कि यह डिजिटल अपग्रेड सिर्फ एक ऊपरी बदलाव बनकर न रह जाए।

अगले कदम और भविष्य की राह

हाई कोर्ट द्वारा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और बेहतर फाइनेंशियल गवर्नेंस पर जोर देना, पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कोर्ट 28 मई को होने वाली अगली हियरिंग में इन रिफॉर्म्स की प्रगति की समीक्षा करेगा और आगे के कदमों पर चर्चा कर सकता है। KITFRA के साथ मिलकर काम करना TDB के फाइनेंशियल सिस्टम को मॉडर्न बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.