Coorg Homestay Owner पर केस पर लगी रोक, कर्नाटक HC का बड़ा फैसला

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Coorg Homestay Owner पर केस पर लगी रोक, कर्नाटक HC का बड़ा फैसला

कर्नाटक हाई कोर्ट ने कूर्ग (Coorg) के एक होमस्टे मालिक के खिलाफ क्रिमिनल केस पर रोक लगा दी है। मालिक पर आरोप था कि उसने गेस्ट के साथ हुई मारपीट की घटना की रिपोर्ट पुलिस को नहीं दी थी। कोर्ट ने कहा कि यह आरोप एक पुराने, रद्द हो चुके कानून पर आधारित थे और मौजूदा कानूनों के तहत मालिक की ऐसी कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं बनती।

क्या है पूरा मामला?

कर्नाटक हाई कोर्ट ने कूर्ग के एक होमस्टे मालिक को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उस होमस्टे मालिक के खिलाफ चल रही क्रिमिनल कार्यवाही पर रोक लगा दी है, जिस पर एक विदेशी टूरिस्ट के साथ हुई यौन शोषण की घटना के बाद पुलिस को जानकारी नहीं देने का आरोप था। होमस्टे मालिक पर यह भी आरोप था कि उसने अपने ही एक कर्मचारी द्वारा एक 33 वर्षीय अमेरिकी नागरिक के खिलाफ किए गए अपराध की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी।

कोर्ट ने क्यों लगाई रोक?

जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की बेंच ने सुनवाई करते हुए पाया कि अभियोजन पक्ष ने "Foreigners Act of 1946" का सहारा लिया था, जो अब रद्द हो चुका है। कोर्ट ने यह भी माना कि "Bharatiya Nyaya Sanhita" के सेक्शन 239 के तहत होमस्टे मालिक की ऐसी कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी कि वह इस घटना की रिपोर्ट करे, खासकर तब जब वह घटना का चश्मदीद गवाह भी नहीं था। यह घटना 12 अप्रैल को हुई थी।

मुख्य आरोपी पर क्या असर?

यह मामला तब सामने आया जब होमस्टे के कर्मचारी पर टूरिस्ट को नशीला पदार्थ देने और फिर यौन शोषण करने का आरोप लगा। हालांकि, कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया गया था और उसे जमानत भी नहीं मिली थी, लेकिन होमस्टे मालिक को 19 अप्रैल को जानकारी छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मालिक को 2 मई को जमानत मिल गई थी, लेकिन उसने अपने खिलाफ लगे आरोपों को रद्द करने की मांग की थी। मालिक का कहना था कि उस पर लगाए गए आरोप मूल दावों से अलग हैं और उसके खिलाफ कोई दंडनीय अपराध नहीं बनता।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कोर्ट का यह फैसला केवल होमस्टे मालिक पर लागू होता है। यौन शोषण के मुख्य आरोपी के खिलाफ कानूनी जांच और मुकदमे की कार्यवाही जारी रहेगी और इस फैसले से अप्रभावित रहेगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील अंगद कामथ और राज्य की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर बीएन जगदीशा पेश हुए।

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