Sona Comstar की कमान को लेकर Kapur परिवार में घमासान, ₹30,000 करोड़ की प्रॉपर्टी पर विवाद

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Sona Comstar की कमान को लेकर Kapur परिवार में घमासान, ₹30,000 करोड़ की प्रॉपर्टी पर विवाद
Overview

Kapur परिवार की ₹30,000 करोड़ की एस्टेट (Estate) को लेकर विरासत का झगड़ा गहराता जा रहा है, जिसका सीधा असर ऑटो पार्ट्स बनाने वाली दिग्गज कंपनी Sona Comstar के कंट्रोल पर पड़ रहा है। रानी कपूर RK Family Trust की वैधता पर सवाल उठा रही हैं, वहीं सनजय कपूर के बच्चे अपनी विधवा मां प्रिया सचदेव कपूर के पक्ष वाली विवादित वसीयत को चुनौती दे रहे हैं।

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₹30,000 करोड़ की ऑटो सल्तनत पर Kapur परिवार का झगड़ा

दिवंगत उद्योगपति सनजय कपूर की करीब ₹30,000 करोड़ की संपत्ति को लेकर एक कड़वी, कई मोर्चों पर लड़ी जा रही कानूनी लड़ाई छिड़ गई है। इसमें उनकी मां रानी कपूर, पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और पहली शादी से हुए बच्चे शामिल हैं। यह विवाद RK Family Trust की वैधता और एक विवादास्पद वसीयत (Will) पर केंद्रित है, जिससे ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली प्रमुख कंपनी Sona Comstar के लिए गवर्नेंस (Governance) संबंधी अनिश्चितता पैदा हो गई है, जहां कपूर चेयरमैन थे। यह लंबा कानूनी संघर्ष भारत के प्रमुख कारोबारी परिवारों में एस्टेट प्लानिंग (Estate Planning) की खामियों को उजागर करता है, जो कॉर्पोरेट स्थिरता और निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।

रानी कपूर ने RK Family Trust की वैधता को दी चुनौती

रानी कपूर सीधे RK Family Trust को चुनौती दे रही हैं। उनका आरोप है कि यह ट्रस्ट उनकी जानकारी या सहमति के बिना धोखाधड़ी से बनाया गया था और महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर जाली हस्ताक्षर हैं। उनके वकील वैभव गर्ग का कहना है कि ट्रस्ट की सेटलर (Settlor) के तौर पर, रानी कपूर को नियंत्रण का अधिकार है और उन्होंने इसे खत्म करने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की है। यह चुनौती ट्रस्ट की होल्डिंग्स, खासकर Aureus Investment Private Ltd के जरिए Sona Comstar में उसके बड़े स्टेक (Stake) के लिए एक नाजुक स्थिति पैदा करती है। ट्रस्ट डीड (Trust Deed) खुद, जो 26 अक्टूबर, 2017 को हुआ था, दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमे का केंद्र बिंदु है।

बच्चे सनजय कपूर की वसीयत को चुनौती देकर ट्रस्टीशिप की लड़ाई में कूदे

मामले को और जटिल बनाते हुए, अभिनेता करिश्मा कपूर के साथ सनजय कपूर के बच्चों, सामैरा और किआन ने प्रिया सचदेव कपूर द्वारा पेश की गई वसीयत को चुनौती दी है। उनका दावा है कि यह वसीयत जाली है और उन्हें बेदखल करने के इरादे से बनाई गई है। इससे RK Family Trust की ट्रस्टीशिप (Trusteeship) को लेकर एक समानांतर लड़ाई छिड़ गई है, जहां रानी और प्रिया कपूर एक-दूसरे को हटाने के लिए प्रतिस्पर्धी नोटिस जारी कर रही हैं, जिससे गवर्नेंस में एक खालीपन आ गया है। प्रिया कपूर को औपचारिक रूप से Sona Comstar में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (Non-Executive Director) नियुक्त किया गया है, जिसका रानी कपूर ने विरोध किया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पारिवारिक और वित्तीय दांव को स्वीकार करते हुए मध्यस्थता (Mediation) को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया है।

परिवार के विवाद के बीच Sona Comstar में लीडरशिप वैक्यूम

ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स सेक्टर में एक प्रमुख खिलाड़ी, Sona Comstar, जिसकी मार्केट कैप (Market Cap) करीब ₹31,000 करोड़ है, लीडरशिप वैक्यूम और चल रहे कानूनी विवादों के कारण अस्थिरता का सामना कर रही है। कंपनी का कहना है कि रानी कपूर 2019 से शेयरधारक नहीं हैं और उनके विरोध के बावजूद, बोर्ड की नियुक्तियां और एजीएम (AGM) की कार्यवाही कानूनी सलाह के अनुसार हुई है। हालांकि, परिवार की संपत्ति का मुख्य हिस्सा ट्रस्ट स्ट्रक्चर (Trust Structures) के माध्यम से Sona Comstar में उनके स्टेक से जुड़ा हुआ है। ट्रस्ट और वसीयत के मुकदमे का नतीजा इस प्रमुख इंडस्ट्री प्लेयर के कंट्रोल और स्ट्रेटेजिक डायरेक्शन (Strategic Direction) को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवाद, खासकर लिस्टेड कंपनियों (Listed Companies) से जुड़े, स्टॉक वैल्यूएशन (Stock Valuations) और मार्केट सेंटीमेंट (Market Sentiment) पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

Kapur केस भारत की सक्सेशन प्लानिंग (Succession Planning) की चुनौतियों को उजागर करता है

भारत में पारिवारिक व्यवसायों के लिए सक्सेशन प्लानिंग अक्सर चुनौतीपूर्ण होती है, जिससे लंबे कानूनी युद्ध होते हैं। Kapur केस 40,000 करोड़ रुपये की फरीदकोट शाही परिवार की 30 साल की विरासत लड़ाई जैसे अन्य हाई-प्रोफाइल विवादों को दर्शाता है। कानूनी पेशेवर वसीयत की तुलना में मजबूत ट्रस्ट स्ट्रक्चर की वकालत करते हैं। वसीयतें अक्सर जबरदस्ती, मानसिक क्षमता की कमी, या कई परस्पर विरोधी दस्तावेजों के सामने आने के आरोपों के कारण मुकदमेबाजी का केंद्र बन जाती हैं। इन मामलों की जटिलता, भारत में विरासत कर (Inheritance Tax) की अनुपस्थिति के साथ, धनी परिवारों को धन के क्षरण को रोकने और पारिवारिक सद्भाव बनाए रखने के लिए बदलावों की सावधानीपूर्वक योजना बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जो कि वर्तमान Kapur परिवार विवाद से एक महत्वपूर्ण सबक है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.