J&K हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: CIC जल्द निपटाए RTI अर्जियों का अंबार!

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AuthorMehul Desai|Published at:
J&K हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: CIC जल्द निपटाए RTI अर्जियों का अंबार!

जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट ने सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) को निर्देश दिया है कि वह लंबित RTI अपीलों के निपटारे में तेजी लाए और अपनी कार्यक्षमता को बेहतर बनाए। कोर्ट ने माना कि भले ही कोई कानूनी समय-सीमा न हो, कमीशन सालों तक मामलों को अनसुलझा नहीं छोड़ सकता।

कोर्ट का अहम फैसला

जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) को लंबित राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) अपीलों के बढ़ते बोझ को संभालने के लिए अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट का यह आदेश बारामुला के एक निवासी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation) के बाद आया है। याचिका में मांग की गई थी कि कमीशन को क्षेत्र से संबंधित सभी लंबित मामलों को 45 दिनों के भीतर हल करने के लिए बाध्य किया जाए।

कानूनी सीमाओं पर कोर्ट का रुख

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की एक डिवीजन बेंच ने कहा कि RTI एक्ट 2005 दूसरी अपीलों और शिकायतों के निपटारे के लिए कोई वैधानिक समय-सीमा तय नहीं करता है। इस कानूनी हकीकत को देखते हुए, बेंच ने 45 दिनों की एक निश्चित निपटान समय-सीमा का अनिवार्य आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि एक निश्चित समय-सीमा की अनुपस्थिति कमीशन को अनिश्चित काल तक फैसलों में देरी करने का अधिकार नहीं देती है।

जजों ने कहा कि अपीलों को कई सालों तक अनसुलझा छोड़ना पारदर्शिता कानून की भावना के विपरीत है। कमीशन को एक मजबूत प्रबंधन प्रणाली लागू करने का निर्देश दिया गया है जो मौजूदा बैकलॉग और नए आवेदनों की निरंतर धारा दोनों को प्रभावी ढंग से संसाधित कर सके, साथ ही अपनी वर्तमान ढांचागत और स्टाफ की कमी को भी ध्यान में रखे। कोर्ट ने CIC को याचिकाकर्ता के सुझावों का मूल्यांकन करने की भी सलाह दी, यदि वे व्यावहारिक और कमीशन की परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप पाए जाते हैं।

पारदर्शिता और शासन पर प्रभाव

RTI एक्ट भारतीय नागरिकों के लिए सार्वजनिक प्राधिकरणों को जवाबदेह ठहराने का एक प्राथमिक तंत्र है, और अपीलीय प्रक्रिया में देरी अक्सर इस उद्देश्य में बाधा डालती है। जब अपीलें लंबी अवधि तक लंबित रहती हैं, तो सार्वजनिक निरीक्षण के लिए एक उपकरण के रूप में कानून की प्रभावशीलता कमजोर हो सकती है। इन प्रणालीगत देरी को संबोधित करके, अदालत का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कमीशन अधिक मज़बूती से काम करे। याचिकाकर्ता और प्रतिवादियों दोनों के लिए कानूनी वकील की उपस्थिति में कार्यवाही संपन्न हुई।

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