सुप्रीम कोर्ट का AI पर शिकंजा: लीगल टेक कंपनियों के लिए नए नियम!

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AuthorNeha Patil|Published at:
सुप्रीम कोर्ट का AI पर शिकंजा: लीगल टेक कंपनियों के लिए नए नियम!

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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने ड्राफ्ट रेगुलेशन पेश किए हैं, जिसमें 'प्रोवैनेंस रिकॉर्ड' को अनिवार्य बनाने की बात कही गई है। इसका मकसद AI के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि AI द्वारा बनाई गई गलत या नकली जानकारी पर लगाम लगाई जा सके।

क्या है नया नियम?

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने 'रेगुलेशन फॉर यूज़ ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन कोर्ट्स, 2026' का ड्राफ्ट जारी किया है। ये नियम कानूनी व्यवस्था में AI के उपयोग की सीमाएं तय करते हैं। ड्राफ्ट के अनुसार, AI को रिसर्च, ड्राफ्टिंग और अनुवाद जैसे कामों में मदद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह न्यायिक निर्णय लेने की जगह नहीं ले सकता।

इस प्रस्ताव का एक अहम हिस्सा 'फाइलिंग प्रोवैनेंस रिकॉर्ड' है। इसके तहत, वकीलों को यह बताना होगा कि किसी भी कोर्ट फाइलिंग में AI का इस्तेमाल कैसे किया गया। इसमें यह भी शामिल होगा कि कौन से AI टूल्स इस्तेमाल हुए, उनके ओरिजिनल सोर्स क्या थे, और क्या किसी इंसान ने उसकी समीक्षा की थी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोर्ट के सामने पेश की गई सारी जानकारी वेरिफायेबल हो और AI की गलतियों या मनगढ़ंत बातों का नतीजा न हो।

AI रेगुलेशन का बिज़नेस पर असर

टेक्नोलॉजी कंपनियों और लीगल-टेक स्टार्टअप्स के लिए, यह कदम AI डेवलपमेंट में 'जवाबदेही को प्राथमिकता' देने की ओर इशारा करता है। जैसे-जैसे भारतीय अदालतें और अन्य पेशेवर क्षेत्र AI अपनाएंगे, 'समझाने योग्य' (Explainable) और 'ऑडिट करने योग्य' (Auditable) टूल्स की मांग बढ़ेगी। जो कंपनियां लॉ फर्मों या कॉर्पोरेट लीगल डिपार्टमेंट्स के लिए AI सॉल्यूशंस प्रदान करती हैं, उन्हें अपने प्रोडक्ट्स को ऐसे फीचर्स के साथ अपडेट करना पड़ सकता है जो डेटा सोर्स, मेटाडेटा और वर्जन कंट्रोल को ट्रैक कर सकें। इससे प्रोडक्ट डेवलपमेंट थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन विश्वसनीय और कंप्लायंस-रेडी लीगल टेक सॉल्यूशंस के लिए एक प्रीमियम बाजार भी तैयार हो सकता है।

AI विश्वसनीयता का रिस्क

कोर्ट का यह फोकस AI-जनित 'मतिभ्रम' (Hallucinations) जैसी वास्तविक समस्याओं से प्रेरित है। ऐसे मामले सामने आए हैं जहां AI मॉडल्स ने नकली कानूनी उद्धरण (citations) या ऐसे जजमेंट बना दिए जो मौजूद ही नहीं थे। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि AI लैंग्वेज मॉडल तथ्यात्मक सत्यापन के बजाय पैटर्न के आधार पर कंटेंट जनरेट करते हैं। नए नियम यह साफ करते हैं कि फाइल की गई सामग्री के लिए कानूनी पेशेवर पूरी तरह से जिम्मेदार होंगे। ऐसे फर्मों के लिए यह एक जोखिम है जो बिना वेरिफाइ किए AI टूल्स पर निर्भर करते हैं, क्योंकि गलतियों से पेशेवर दंड या केस की विश्वसनीयता पर आंच आ सकती है। इसलिए, AI पर निर्भरता अधिक सतर्क और वेरिफिकेशन-केंद्रित होने की संभावना है।

टेक प्रोवाइडर्स कैसे कर सकते हैं बदलाव?

हम लीगल सेक्टर में जेनेरिक, ओपन-सोर्स AI टूल्स से हटकर विशेष, 'वॉलड-गार्डन' AI सिस्टम की ओर एक बदलाव देख सकते हैं, जो वेरिफाइड लीगल डेटाबेस पर प्रशिक्षित हों और जिनमें इन-बिल्ट ऑडिट ट्रेल्स हों। IT सर्विस प्रोवाइडर्स और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के लिए, यह अपने प्रोडक्ट्स को अलग दिखाने का एक अवसर है। ऐसे टूल्स जो जरूरी प्रोवैनेंस रिकॉर्ड्स को ऑटोमेटिकली जनरेट करते हैं या संभावित गलतियों को फ्लैग करते हैं, वे लॉ फर्मों के लिए अधिक आकर्षक होंगे। हालांकि, इसका मतलब यह भी है कि कंपनियों को मजबूत क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम बनाने में अधिक खर्च करना होगा, जो अल्पावधि में ऑपरेटिंग मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।

निवेशक क्या ट्रैक करें?

IT सर्विसेज और सॉफ्टवेयर सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को कुछ प्रमुख विकासों पर ध्यान देना चाहिए। पहला, यह देखें कि क्या ये दिशानिर्देश वित्त, स्वास्थ्य सेवा, या लेखांकन जैसे अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के नियम लाते हैं, जहां AI की सटीकता भी महत्वपूर्ण है। दूसरा, यह देखें कि प्रमुख IT कंपनियां अपने एंटरप्राइज AI पैकेजों को 'ट्रेसेबिलिटी' फीचर्स के साथ कैसे अनुकूलित करती हैं। अंत में, देयता कानूनों (liability laws) या वकीलों और सलाहकारों के लिए पेशेवर मानकों में किसी भी बदलाव पर नजर रखें जो AI सिस्टम के निर्माताओं और उपयोगकर्ताओं की ओर सबूत के बोझ को और स्थानांतरित कर सकता है। 'प्रायोगिक' AI से 'विनियमित' AI में परिवर्तन आने वाले वर्षों में टेक्नोलॉजी एडॉप्शन के लिए एक महत्वपूर्ण थीम होगा।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.