छोटे कारोबारियों को राहत! भारत सरकार लाई नया बिल, ऑडिट का बोझ होगा कम

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AuthorNeha Patil|Published at:
छोटे कारोबारियों को राहत! भारत सरकार लाई नया बिल, ऑडिट का बोझ होगा कम
Overview

भारत सरकार छोटे व्यवसायों के लिए ऑडिट की ज़रूरतों को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। 'कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2026' (Companies (Amendment) Bill, 2026) के तहत, सरकार छोटे कंपनियों की परिभाषा का विस्तार करके कंप्लायंस कॉस्ट (compliance cost) और एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क (administrative work) को कम करने की योजना बना रही है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन बदलावों के दुरुपयोग को रोकने के लिए स्पष्ट नियमों और मजबूत सुरक्षा उपायों की ज़रूरत होगी।

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ऑडिट के नियमों में ढील

'कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2026' के प्रस्तावों के तहत, छोटे व्यवसायों के लिए अनिवार्य ऑडिट (mandatory audit) की ज़रूरतों में काफी कमी आ सकती है। इस विधेयक का उद्देश्य कंपनी अधिनियम, 2013 (Companies Act, 2013) में एक नई धारा 139(12) जोड़ना है, जिससे सरकार को कुछ खास तरह की कंपनियों को अनिवार्य ऑडिटर नियुक्ति से छूट देने का अधिकार मिलेगा।

'छोटी कंपनी' की परिभाषा का विस्तार

यह राहत 'छोटी कंपनी' की परिभाषा को व्यापक बनाने से जुड़ी है। प्रस्ताव के अनुसार, पेड-अप कैपिटल (paid-up capital) की मौजूदा सीमा ₹10 करोड़ से बढ़ाकर ₹20 करोड़ और टर्नओवर (turnover) की सीमा ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹200 करोड़ की जा सकती है। इस बदलाव से ज़्यादा कंपनियाँ सरल कंप्लायंस उपायों के दायरे में आ सकेंगी।

एक्सपर्ट्स की मांग: स्पष्ट नियम और सुरक्षा उपाय

बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी (Bombay Chartered Accountants Society) के प्रेसिडेंट ज़ुबिन बिलिमोरिया (Zubin Billimoria) जैसे एक्सपर्ट्स का कहना है कि पात्रता के स्पष्ट मानदंड तय करना बहुत ज़रूरी है। बिलिमोरिया ने यह भी कहा कि यह देखना बाकी है कि 'छोटी कंपनी' के विस्तारित दायरे की सीमाएं सीधे ऑडिट छूट पर लागू होंगी या कम सीमाएं तय की जाएंगी। उन्होंने सलाह दी है कि लिस्टेड डेट (listed debt), पब्लिक डिपॉजिट्स (public deposits) या रेगुलेटेड इंडस्ट्रीज (regulated industries) में शामिल कंपनियों को छोड़कर, केवल अनलिस्टेड प्राइवेट फर्मों पर इस छूट को केंद्रित करने के लिए सुरक्षा उपाय होने चाहिए।

फायदे और वैकल्पिक निगरानी

छोटी संस्थाओं को अनिवार्य ऑडिट से छूट मिलने से कंप्लायंस कॉस्ट में कमी और एडमिनिस्ट्रेटिव बोझ में गिरावट जैसे कई फायदे हो सकते हैं। यह पहले से ही छोटी कंपनियों के लिए मौजूद छूटों के समान है। एक्सपर्ट्स ने वैकल्पिक निगरानी तंत्र का भी सुझाव दिया है, जैसे कि किसी डायरेक्टर और क्वालिफाइड अकाउंटेंट द्वारा सेल्फ-सर्टिफाइड फाइनेंशियल स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर करना, और रेगुलेटर्स के पास ज़रूरत पड़ने पर समीक्षा करने और छूट रद्द करने का अधिकार बना रहेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.