India Foreign Awards: अब विदेश के फैसले भारत में होंगे लागू, बिजनेस को मिलेगा बूस्ट!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Foreign Awards: अब विदेश के फैसले भारत में होंगे लागू, बिजनेस को मिलेगा बूस्ट!
Overview

भारत के कानूनी सिस्टम ने विदेशी आर्बिट्रल अवार्ड्स (Foreign Arbitral Awards) को लागू करने के अपने ढांचे को और मजबूत किया है। आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सीलिएशन एक्ट, 1996 के तहत, यह कदम न्यूयॉर्क कन्वेंशन (New York Convention) के अनुरूप है, जिसका मकसद अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों (International Commercial Disputes) के समाधान में निश्चितता और अनुमान लगाने की क्षमता लाना है।

भारत ने विदेशी आर्बिट्रल अवार्ड्स को लागू करने की प्रक्रिया को आसान बनाकर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (International Business) को आकर्षित करने के लिए अपने कानूनी ढांचे को मजबूत किया है। यह कदम भारत को अंतर्राष्ट्रीय आर्बिट्रेशन (International Arbitration) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

फॉरेन अवॉर्ड (Foreign Award) किसे माना जाएगा?

एक्ट के तहत, 'फॉरेन अवॉर्ड' (Foreign Award) आमतौर पर एक कमर्शियल डिस्प्यूट (Commercial Dispute) से निकला हुआ वो फैसला होता है जो ऐसे देश से जारी होता है जिसे भारत आधिकारिक तौर पर मान्यता देता है। इसे लागू करवाने के लिए, पार्टियों को ओरिजिनल अवॉर्ड (या सर्टिफाइड कॉपी), आर्बिट्रेशन एग्रीमेंट (Arbitration Agreement) और उसके फॉरेन ओरिजिन का सबूत पेश करना होता है।

लागू करने से मना करने के सीमित कारण

भारत के कानून में ऐसे बहुत सख्त और सीमित कारण बताए गए हैं जिनके तहत किसी फॉरेन अवॉर्ड को लागू करने से मना किया जा सकता है। इनमें शामिल हैं:

  • पार्टियों की एग्रीमेंट में एंटर करने की क्षमता से जुड़े मुद्दे।
  • आर्बिट्रेशन एग्रीमेंट का अमान्य होना।
  • किसी पार्टी को आर्बिट्रेशन की सही सूचना न मिलना।
  • अवॉर्ड का दायर से बाहर जाना जिस पर सहमति बनी थी।
  • डिस्प्यूट का ऐसा विषय होना जिसे भारत में कानूनी तौर पर आर्बिट्रेट (Arbitrate) नहीं किया जा सकता।
  • भारत की मौलिक पब्लिक पॉलिसी (Public Policy) का उल्लंघन, जिसे बहुत संकीर्ण रूप से समझा जाता है और आमतौर पर इसमें धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार शामिल होता है।

भारतीय कोर्ट्स का रवैया

भारतीय कोर्ट्स (Indian Courts) ने लगातार फॉरेन अवॉर्ड्स को लागू करने को प्राथमिकता दी है, और वे केवल न्यूनतम हस्तक्षेप करती हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के महत्वपूर्ण फैसलों, जैसे Shri Lal Mahal Ltd. v. Progetto Grano Spa और Vijay Karia v. Prysmian Cavi, ने यह स्पष्ट किया है कि ये प्रोसीडिंग्स (Proceedings) ओरिजिनल अवॉर्ड पर अपील करने के अवसर नहीं हैं। कोर्ट्स ने इस बात पर जोर दिया है कि मामूली प्रक्रियात्मक मुद्दे पब्लिक पॉलिसी के आधार पर लागू करने से इनकार करने के कारण नहीं हैं। यह रुख भारत के साथ व्यापार करने वाले व्यवसायों के लिए अधिक आश्वासन प्रदान करता है। कानून अवॉर्ड के लागू होने के दौरान संपत्तियों की सुरक्षा के लिए अंतरिम उपायों (Interim Measures) की भी अनुमति देता है।

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