इंसॉल्वेंसी पेटिशन की स्वीकार्यता पर बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले (Vidarbha Industries Power Ltd.) को पलटते हुए, नए अमेंडमेंट एक्ट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) को यह अधिकार छीन लिया है कि वह किसी डिफॉल्ट (Default) के साबित होने पर भी, कुछ परिस्थितियों का हवाला देकर इंसॉल्वेंसी पेटिशन को रिजेक्ट कर सके। पहले कॉर्पोरेट डेटर्स इस बात का फायदा उठाकर कानूनी लड़ाई को लंबा खींचते थे। अब, एक्ट के अहम सेक्शन में 'मे' (may) की जगह 'शैल' (shall) का इस्तेमाल हुआ है। इसका मतलब है कि अब पेटिशन को केवल आवेदन की पूर्णता, डिफॉल्ट साबित होने और प्रोफेशनल की इंटीग्रिटी जैसे आधारों पर ही रिजेक्ट किया जा सकेगा। एडमिशन स्टेज अब एक प्रक्रियात्मक कदम बन गया है, न कि लंबी कानूनी लड़ाई।
क्रेडिटर-इनिशिएटेड रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIIRP) की शुरुआत
इस अमेंडमेंट की एक खास बात है क्रेडिटर-इनिशिएटेड इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIIRP)। यह एक नया आउट-ऑफ-कोर्ट प्रोसेस है, जिसमें डेटर अपनी संपत्ति का कब्ज़ा बनाए रख सकता है। अगर फाइनैंशियल क्रेडिटर्स के पास कम से कम 51% कर्ज है, तो वे 30 दिनों का नोटिस देकर CIIRP शुरू कर सकते हैं। अगर डेटर आपत्ति नहीं करता, तो एक रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional) नियुक्त किया जाएगा और मौजूदा मैनेजमेंट सुपरविजन में काम करता रहेगा। CIIRP को 150 दिनों के अंदर पूरा करना होगा, जो मौजूदा CIRP से ज़्यादा तेज़ रास्ता साबित हो सकता है। हालांकि, इसकी सफलता सरकार द्वारा योग्य क्रेडिटर्स को नोटिफाई करने पर निर्भर करेगी।
सरकारी बकाया (Government Dues) की प्राथमिकता का पुनर्मूल्यांकन
सुप्रीम कोर्ट के 'स्टेट टैक्स ऑफिसर बनाम रेनबो पेपर्स लिमिटेड' (State Tax Officer v. Rainbow Papers Ltd.) मामले के फैसले से उत्पन्न एक समस्या का समाधान भी कर दिया गया है। उस फैसले में सरकारी टैक्स ड्यूज को सिक्योर्ड क्रेडिटर का दर्जा दिया गया था, जिससे वे लेंडर्स की सिक्योरिटी इंटरेस्ट (Security Interest) पर हावी हो सकते थे। नया अमेंडमेंट स्पष्ट करता है कि सिक्योरिटी इंटरेस्ट केवल पार्टियों के बीच हुए एग्रीमेंट से आनी चाहिए, न कि केवल कानून से। अब सरकारी बकाया, जिनमें एक स्टेट्यूटरी चार्ज (statutory charge) है, उन्हें सिक्योर्ड क्रेडिटर की परिभाषा से बाहर रखा गया है। इससे सिक्योर्ड लेंडर्स का भरोसा बढ़ा है।
'क्लीन स्लेट' सिद्धांत का वैधानिक codification
'क्लीन स्लेट' (Clean Slate) सिद्धांत, जो रेजोल्यूशन एप्लीकेंट्स को CIRP से पहले के दावों से मुक्त करता है, अब कानूनी रूप से स्थापित हो गया है। पहले यह अदालती व्याख्याओं पर आधारित था, लेकिन अब इसे कानून में लिखा गया है, जिससे इसे लागू करना और चुनौती देना मुश्किल हो गया है। यह अमेंडमेंट बिज़नेस के लिए ज़रूरी लाइसेंस, ग्रांट्स और परमिट्स को भी सुरक्षित रखता है। रेजॉल्व्ड पिछली देनदारियों के कारण इन्हें रद्द नहीं किया जा सकेगा, जो रेगुलेटेड इंडस्ट्रीज की कंपनियों के संचालन के लिए महत्वपूर्ण है।
