स्कीम का मकसद: कम्प्लायंस बढ़ाना, पेनल्टी कम करना
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने यह पहल कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाने और कंपनी फाइलिंग के बैकलॉग को खत्म करने के लिए शुरू की है। इसका मुख्य उद्देश्य उन कंपनियों की मदद करना है जो पुरानी गैर-अनुपालन (non-compliance) के कारण दंड का सामना कर रही थीं। MCA का लक्ष्य कम्प्लायंस दर को बढ़ाना, जमा हुए अतिरिक्त शुल्कों का वित्तीय बोझ कम करना और कंपनी रजिस्ट्री को सटीक बनाए रखना है।
फीस में भारी कटौती का फायदा
यह स्कीम उन कंपनियों के लिए खास है जो 15 अप्रैल से 15 जुलाई के बीच overdue e-forms फाइल करेंगी। उन्हें सामान्य अतिरिक्त शुल्क (additional fee) का मात्र 10% ही देना होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी फाइलिंग में 300 दिनों की देरी हुई है, जिसका सामान्य अतिरिक्त शुल्क ₹30,000 (₹100 प्रतिदिन के हिसाब से) होता, वह अब केवल ₹3,000 में पूरी हो जाएगी। इसके अलावा, डॉर्मेंट स्टेटस (dormant status) के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों को सामान्य शुल्क का आधा और कंपनी बंद (closure) करने की प्रक्रिया में एक-चौथाई शुल्क देना होगा।
पेनल्टी से कैसे मिलेगी राहत?
कंपनियाँ कुछ खास तरह की फाइलिंग्स के लिए पेनल्टी से छूट (immunity) पा सकती हैं। यह छूट उन ई-फॉर्म्स पर लागू होती है जो सेक्शन 92 और 137 से संबंधित हैं, बशर्ते वे किसी एडजुडिकेटिंग ऑफिसर से नोटिस मिलने से पहले या नोटिस मिलने के 30 दिनों के भीतर फाइल किए जाएं। यदि स्कीम के तहत फॉर्म फाइल कर दिए जाते हैं और कोई मुकदमा या एडजुडिकेशन कार्यवाही पहले से शुरू नहीं हुई है, तो भविष्य की कानूनी कार्रवाई से भी राहत मिल सकती है।
क्या है स्कीम में शामिल नहीं?
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वार्षिक फॉर्म्स के लिए सामान्य फाइलिंग शुल्क (filing fee) में कोई कमी नहीं की गई है। साथ ही, यह स्कीम सेक्शन 96 के तहत आवश्यक वार्षिक आम बैठक (Annual General Meeting - AGM) आयोजित न करने के लिए कोई छूट नहीं देती है। हालांकि, कंपनियाँ अभी भी पिछले वर्षों के लिए AGM बुला सकती हैं, अपने वित्तीय विवरणों को मंजूरी दे सकती हैं, और फिर इस स्कीम के तहत अपडेटेड फॉर्म फाइल कर सकती हैं।
डिफॉल्टर कंपनियों के लिए आखिरी चेतावनी
MCA ने साफ चेतावनी दी है कि जो कंपनियाँ 15 जुलाई की समय सीमा तक इस स्कीम का लाभ नहीं उठातीं, उन्हें इसके बाद प्रवर्तन कार्रवाई (enforcement action) का सामना करना पड़ सकता है। इसमें कंपनी का नाम आधिकारिक रजिस्टर से हटाया जाना भी शामिल है।
