AI को लेखक मानने पर बड़ा सवाल?
दिल्ली हाईकोर्ट ने AI-जनित कलाकृति के कॉपीराइट पर एक अहम फैसला सुनाने की तैयारी कर ली है। कोर्ट ने इस मामले में आठ हफ्तों की समय सीमा तय की है, जो इसे 27 अप्रैल, 2026 तक सुलझाने की उम्मीद है। यह मामला स्टीफन थैलेर के AI सिस्टम, DABUS, द्वारा बनाई गई 'A Recent Entrance to Paradise' नामक कलाकृति के कॉपीराइट से जुड़ा है, जिसके लिए 2022 में आवेदन किया गया था।
यह आदेश भारत के कॉपीराइट एक्ट, 1957 को एक नई चुनौती देता है, जो पारंपरिक रूप से केवल इंसानों को ही लेखक मानता है। हालांकि, भारतीय कानून "कंप्यूटर-जनित कार्यों" के लिए कॉपीराइट की अनुमति देता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पूरी तरह से स्वायत्त (autonomous) AI सिस्टम को "काम बनाने का कारण" माना जा सकता है। थैलेर का तर्क है कि AI-जनित कार्य इस श्रेणी में आते हैं, और रचना शुरू करने वाली इकाई (AI) को लेखक माना जाना चाहिए।
दुनिया भर में AI कॉपीराइट की स्थिति
वैश्विक स्तर पर, अधिकांश कानूनी प्रणालियाँ AI को लेखक के रूप में स्वीकार करने से हिचकिचाती हैं। उनका मानना है कि कॉपीराइट मानव रचनात्मकता की रक्षा करता है। अमेरिकी कॉपीराइट कार्यालय ने दोहराया है कि मानव रचनात्मकता आवश्यक है। यूरोपीय संघ (EU) का भी यही रुख है, जहाँ सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि AI सामग्री को मानव लेखक का श्रेय नहीं दिया जा सकता। यूनाइटेड किंगडम (UK) का कॉपीराइट, डिज़ाइन और पेटेंट एक्ट 1988 कंप्यूटर-जनित कार्यों के लेखकत्व को उस व्यक्ति को सौंपता है जिसने "निर्माण के लिए आवश्यक व्यवस्था" की थी। चीन का रुख मिला-जुला है, कुछ अदालतें AI-सहायता प्राप्त कार्यों को स्वीकार करती हैं यदि प्रॉम्प्टिंग में मानव प्रयास दिखाया गया हो, लेकिन AI को लेखक के रूप में बाहर रखती हैं। यूक्रेन ने AI-जनित छवियों के लिए एक अनूठा "Sui Generis" अधिकार बनाया है।
AI निर्माण बाजार और उसका प्रभाव
जेनरेटिव AI टूल्स क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ को तेजी से बदल रहे हैं। क्रिएटिव सेक्टर्स में जेनरेटिव AI का बाजार 2026 तक $5.38 बिलियन और 2030 तक $14.03 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि AI के व्यापक उपयोग, कम लागत और इमर्सिव कंटेंट की मांग से प्रेरित है।
शोध बताते हैं कि AI कंटेंट गैर-AI फर्मों और मानव रचनाकारों को "बाहर कर" सकता है, जिससे छवियों की मात्रा नाटकीय रूप से बढ़ जाएगी जबकि मानव कार्यों में कमी आएगी। उपभोक्ताओं को अधिक प्रतिस्पर्धा और विविधता का लाभ मिल सकता है, लेकिन यह प्रवृत्ति मानव कलाकारों और पेशेवरों के लिए एक चुनौती पेश करती है। बड़ी टेक कंपनियाँ AI विकसित कर रही हैं और पेटेंट, ट्रेड सीक्रेट्स और ओपन-सोर्स तरीकों का उपयोग करके IP की सुरक्षा कर रही हैं।
कानूनी अनिश्चितता और आर्थिक जोखिम
AI लेखकत्व को लेकर यह कानूनी लड़ाई IP फ्रेमवर्क और बिजनेस मॉडल के लिए महत्वपूर्ण अनिश्चितता पैदा करती है। मुख्य जोखिम कॉपीराइट के मूल सिद्धांत, यानी मानव रचनात्मकता को चुनौती देना है। यदि पूरी तरह से AI द्वारा बनाए गए कार्यों को कॉपीराइट नहीं मिलता है, तो बहुत सारी सामग्री सार्वजनिक डोमेन (public domain) में जा सकती है, जिससे AI में निवेश और विकास के लिए प्रोत्साहन कम हो जाएगा। दूसरी ओर, AI लेखकत्व या AI कार्यों के व्यापक अधिकार देने से मशीन कंटेंट का एकाधिकार (monopolization) हो सकता है, जो मानव नवाचार को बाधित कर सकता है। आधुनिक AI सिस्टम में "वह व्यक्ति जिसने काम बनने का कारण बना" की पहचान करना (डेवलपर्स, ट्रेनर्स, उपयोगकर्ता शामिल हैं) कानूनी अस्पष्टता पैदा करता है और लंबे मुकदमेबाजी के जोखिम को बढ़ाता है। इसके अलावा, AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए कॉपीराइट सामग्री का उपयोग करने से उल्लंघन के मुकदमे हुए हैं, जिससे AI फर्मों को अपने डेटा रणनीतियों और व्यावसायिक मॉडल को बदलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।