Meta, Google पर कोर्ट का बड़ा एक्शन: AI Deepfakes तुरंत हटाएं, नहीं तो...

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AuthorMehul Desai|Published at:
Meta, Google पर कोर्ट का बड़ा एक्शन: AI Deepfakes तुरंत हटाएं, नहीं तो...
Overview

भारत की दिल्ली हाई कोर्ट ने Meta और Google को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने इन टेक दिग्गजों को AI-जनित डीपफेक (Deepfakes) और क्रिकेटर गौतम गंभीर की मिलती-जुलती तस्वीरों व नामों के अनधिकृत इस्तेमाल वाली सामग्री को तुरंत हटाने का आदेश दिया है।

सेलेब्रिटीज की पहचान पर AI का खतरा

यह मामला क्रिकेटर गौतम गंभीर द्वारा Meta और Google के खिलाफ दायर ₹2.5 करोड़ के हर्जाने के मुकदमे से जुड़ा है। गंभीर ने आरोप लगाया है कि उनकी पहचान और मिलती-जुलती तस्वीरों का अनधिकृत इस्तेमाल किया गया है। यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि AI-संचालित डिजिटल धोखेबाजी (impersonation) का एक बढ़ता हुआ ट्रेंड है, जो 2025 के बाद से तेज़ी से बढ़ा है। फेस-स्वैपिंग और वॉयस-क्लोनिंग जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल कर पब्लिक फिगर्स को निशाना बनाया जा रहा है। गौतम गंभीर के अलावा अनिल कपूर, अमिताभ बच्चन और सोनाक्षी सिन्हा जैसे कई सेलेब्रिटीज भी अपनी इमेज और आवाज़ के इस तरह के दुरुपयोग के खिलाफ कानूनी रास्ता अपना चुके हैं।

भारत के बदलते AI नियम

यह फैसला भारत में AI को लेकर बदलते नियमों के बीच आया है। 2025 में प्रस्तावित सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमों में 'कृत्रिम रूप से उत्पन्न जानकारी' (synthetically generated information) को कड़ी निगरानी में लाने की तैयारी है। भारतीय अदालतें अब व्यक्तिगत पहचान के अधिकारों (personality rights) को संवैधानिक अधिकारों के तहत गंभीरता से ले रही हैं। 2024 में अनिल कपूर के मामले में आए एक फैसले ने भी सेलेब्रिटीज को उनकी छवि और आवाज़ पर नियंत्रण का अधिकार दिया था।

वैश्विक जोखिम और प्लेटफॉर्म पर बढ़ता दबाव

दुनिया भर में AI-जनित कंटेंट का बढ़ता जाल एक बड़ी चुनौती है। अनुमान है कि 2026 तक ऑनलाइन कंटेंट का 90% AI द्वारा बनाया गया होगा, जिससे वित्तीय धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ जाएगा। अमेरिका में 2027 तक यह जोखिम $40 बिलियन तक पहुँच सकता है। Meta और Google जैसी कंपनियों के लिए डिजिटल कॉमर्स और विज्ञापन मॉडल पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अक्सर प्लेटफॉर्म्स पैसिव टेकडाउन सिस्टम (passive takedown systems) का इस्तेमाल करते हैं, जो डीपफेक के वायरल होने की रफ़्तार से पिछड़ जाते हैं। इससे निपटने के लिए कानूनी फीस, संभावित जुर्माने और AI डिटेक्शन टेक्नोलॉजी में भारी निवेश की ज़रूरत होगी।

भविष्य पर असर

Meta Platforms (META) का मार्केट वैल्यूएशन लगभग $1.50 ट्रिलियन और Alphabet (GOOGL) का $3.51 ट्रिलियन (मार्च 25, 2026 तक) है। ऐसे में, अनुपालन और तकनीकी निवेश पर दांव बहुत बड़ा है। भारत में इस तरह का कोई बड़ा फैसला प्लेटफॉर्म्स की ज़िम्मेदारी को केवल यूज़र-जनरेटेड कंटेंट से आगे बढ़ाकर AI-संचालित गलत सूचनाओं को बढ़ावा देने तक ले जा सकता है, जिससे विज्ञापन रेवेन्यू प्रभावित हो सकता है। भारत में बढ़ते दबाव के बीच, Meta और Google को अपनी कंटेंट मॉडरेशन और वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं को मज़बूत करना होगा। यह वैश्विक स्तर पर डिजिटल पहचान की निगरानी और उसके मुद्रीकरण के मानकों को फिर से परिभाषित कर सकता है।

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