Independent Directors सावधान! अब 2 साल की देरी पर भी जा सकती है कुर्सी, फाइलिंग नियमों में बड़ा बदलाव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Independent Directors सावधान! अब 2 साल की देरी पर भी जा सकती है कुर्सी, फाइलिंग नियमों में बड़ा बदलाव

कॉर्पोरेट जगत में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के लिए अब नियम और सख्त हो गए हैं। कंपनी के जरूरी फाइलिंग्स अगर दो साल तक नहीं होती हैं, तो ऐसे डायरेक्टर्स को अयोग्य करार दिया जाएगा। यह समय-सीमा अभी तीन साल की है, जिसे घटाकर दो साल कर दिया गया है।

बोर्डरूम में बढ़ेगी जवाबदेही

कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल, 2026 के तहत यह बदलाव इसी सितंबर से लागू होने की उम्मीद है। डायरेक्टर्स को अब सिर्फ अपनी कंपनी के ही नहीं, बल्कि वे जिन-जिन कंपनियों के बोर्ड में हैं, उन सभी के फाइलिंग अनुपालन पर बारीकी से नजर रखनी होगी। अगर किसी भी कंपनी में लगातार दो फाइनेंशियल ईयर तक रिटर्न फाइल नहीं होते हैं, तो डायरेक्टर को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाएगा।

6 महीने में छोड़नी होंगी सभी पोस्ट

नए नियमों के मुताबिक, अयोग्य घोषित होने वाले डायरेक्टर्स को अगले 6 महीनों के भीतर अपने सभी बोर्ड पदों से इस्तीफा देना होगा। पहले यह होता था कि एक कंपनी से हटने के बाद भी डायरेक्टर दूसरी कंपनियों में अपनी पोजीशन बनाए रख सकते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। कंपनी अधिनियम की धारा 149(12) के तहत डायरेक्टर्स को जो सुरक्षा मिलती थी, उस पर भी इसका असर पड़ेगा।

गवर्नेंस में सुधार की पहल

यह कदम IL&FS संकट और बड़े बैंकिंग घोटालों जैसे कॉर्पोरेट घोटालों के बाद उठाया गया है। इन मामलों में अक्सर यह देखा गया कि इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स जांच के बावजूद कई कंपनियों के बोर्ड में बने रहे। मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) पहले भी लाखों डायरेक्टर्स के DIN (डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर) को निष्क्रिय कर चुका है, लेकिन यह नए नियम लगातार सक्रिय निगरानी पर जोर देते हैं।

प्रोफेशनल डायरेक्टर्स के लिए नया माहौल

कई डायरेक्टorships संभालने वाले प्रोफेशनल्स के लिए अब कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर और अधिक सक्रिय होने की जरूरत होगी। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सभी संबंधित कंपनियां, छोटी या बड़ी, समय पर अपने जरूरी फाइलिंग्स कर रही हैं। सिर्फ सिटिंग फीस और प्रतिष्ठा पर निर्भर रहने का दौर अब खत्म होता दिख रहा है। यह बदलाव निवेशकों के लिए एक अच्छा संकेत है, क्योंकि इससे बोर्ड रूम में जवाबदेही बढ़ेगी और कंपनियों के अनुपालन का स्तर सुधरेगा।

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