ITAT का बड़ा फैसला: एम्प्लॉयर ने TDS जमा नहीं किया तो कर्मचारी जिम्मेदार नहीं!

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AuthorNeha Patil|Published at:
ITAT का बड़ा फैसला: एम्प्लॉयर ने TDS जमा नहीं किया तो कर्मचारी जिम्मेदार नहीं!

इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर कंपनी (Employer) ने कर्मचारियों का TDS काटा तो है, लेकिन उसे सरकार के पास जमा नहीं किया, तो ऐसे में कर्मचारियों को दोबारा टैक्स नहीं देना होगा। इस फैसले से उन टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिली है जिन्हें TDS मिसमैच के कारण ऑटोमेटेड टैक्स डिमांड नोटिस मिल रहे थे।

क्या है पूरा मामला?

मुंबई ITAT ने एक अहम फैसले में उन कर्मचारियों को टैक्स डिमांड से बचाया है, जिनके एम्प्लॉयर ने TDS तो काट लिया, पर सरकार के पास जमा नहीं किया। यह मामला सोफिया रिक बनाम ITO का था। इसमें देखा गया कि कर्मचारी को सैलरी TDS कटने के बाद मिली थी। लेकिन, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ऑटोमेटेड सिस्टम ने कर्मचारी के TDS क्रेडिट को रिजेक्ट कर दिया, क्योंकि एम्प्लॉयर, M/s Trimax IT Infrastructure & Services Ltd, ने उस रकम को सरकार के पास जमा नहीं कराया था। इसके चलते कर्मचारी को टैक्स के बकाए के लिए ऑटोमेटेड डिमांड नोटिस भेजा गया।

कर्मचारियों को मिली कानूनी सुरक्षा

ट्रिब्यूनल का यह फैसला इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 205 पर आधारित है। इस सेक्शन के मुताबिक, एक बार जब TDS कट जाता है, तो सरकार उस टैक्स को दोबारा पेयर (कर्मचारी) से वसूल नहीं सकती, भले ही एम्प्लॉयर ने पैसा जमा न किया हो। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि काटी गई TDS की रकम अब कर्मचारी का पैसा नहीं रहता। जैसे ही एम्प्लॉयर इसे काट लेता है, इसे सरकार के पास जमा कराने की कानूनी ज़िम्मेदारी पूरी तरह से एम्प्लॉयर की हो जाती है। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि एम्प्लॉयर की गलती की सज़ा कर्मचारी को नहीं दी जा सकती।

TDS मिसमैच क्यों होते हैं?

कई टैक्सपेयर्स को तब ऑटोमेटेड नोटिस मिलते हैं, जब उनके इनकम टैक्स रिटर्न में क्लेम किया गया TDS क्रेडिट और उनके फॉर्म 26AS में मौजूद डेटा के बीच कोई अंतर होता है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) यह जांच ऑटोमेटिकली करता है, जिसमें किसी इंसान का दखल नहीं होता। अगर एम्प्लॉयर ने सैलरी से टैक्स तो काटा है, लेकिन रिटर्न फाइल नहीं किया या पैसा जमा नहीं किया, तो यह ट्रांज़ैक्शन कर्मचारी के फॉर्म 26AS में नज़र नहीं आता। नतीजतन, ऑटोमेटेड सिस्टम यह मान लेता है कि टैक्स कभी चुकाया ही नहीं गया, और कर्मचारी को बची हुई रकम के लिए डिमांड नोटिस भेजा जाता है।

डॉक्यूमेंटेशन ही है सबसे बड़ा सहारा

हालांकि कानून कर्मचारियों की सुरक्षा करता है, लेकिन अगर किसी को डिमांड नोटिस मिलता है, तो उसे अपना केस साबित करने के लिए तैयार रहना चाहिए। ITAT के फैसले से यह स्पष्ट है कि यह साबित करना ज़रूरी है कि TDS काटा गया था। टैक्सपेयर्स को अपनी सैलरी स्लिप्स (जिसमें TDS डिडक्शन दिखाया गया हो), बैंक स्टेटमेंट (जिसमें नेट सैलरी रिसीव हुई हो), और एम्प्लॉयर द्वारा जारी फॉर्म 16 को संभाल कर रखना चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर पेश करना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने असेसिंग ऑफिसर को इन डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करने का निर्देश दिया ताकि TDS क्रेडिट दिया जा सके। इससे यह साबित होता है कि TDS डिडक्शन हुआ था, यह टैक्सपेयर की ज़िम्मेदारी है।

आगे क्या करें टैक्सपेयर्स?

टैक्सपेयर्स को साल भर अपने फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) को नियमित रूप से चेक करते रहना चाहिए, बजाय इसके कि टैक्स फाइलिंग की आखिरी तारीख का इंतजार करें। अगर कोई गड़बड़ी नज़र आती है, तो फौरन अपने एम्प्लॉयर से संपर्क कर उसे ठीक करवाना महत्वपूर्ण है। अगर डिमांड नोटिस आता है, तो उसे नज़रअंदाज़ न करें, बल्कि ज़रूरी सैलरी और बैंक रिकॉर्ड्स के साथ तुरंत जवाब दें ताकि TDS डिडक्शन के अपने दावे को साबित किया जा सके।

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