ITAT का नया नियम: 'गिनती' नहीं, 'इस्तेमाल' मायने रखता है!
यह फैसला इस बात पर ज़ोर देता है कि प्रॉपर्टी की गिनती से ज़्यादा, उसके इस्तेमाल का तरीका मायने रखता है। यह सिर्फ यूनिट्स की संख्या गिनने के बजाय, यह देखता है कि क्या उन्हें एक एकीकृत (Integrated) और कार्यात्मक (Functional) लिविंग स्पेस में बदला गया है।
छह फ्लैट्स से बना 'ट्रिप्लेक्स' और टैक्स का फैसला
एक खास मामले में, जहाँ Siddharth Bhaskar Shah नाम के एक व्यक्ति ने तीन फ्लोर्स पर फैले छह फ्लैट्स को अंदरूनी सीढ़ियों की मदद से जोड़कर एक 'ट्रिप्लेक्स' (Triplex) जैसा बड़ा घर बनाया था, ट्रिब्यूनल ने इस बात से सहमति जताई कि इसे एक ही रेजिडेंशियल हाउस (Residential House) माना जाए। यह दिल्ली और कर्नाटक हाई कोर्ट के पहले के फैसलों के अनुरूप भी है, जो प्रॉपर्टी के वास्तविक उपयोग और मंशा को प्राथमिकता देते हैं।
प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए क्या है मतलब?
यह फैसला रियल एस्टेट की दुनिया, खासकर लग्जरी प्रॉपर्टी सेगमेंट के लिए बहुत अहम है, जहाँ खरीदार अक्सर डुप्लेक्स (Duplexes) और ट्रिप्लेक्स (Triplexes) जैसी बड़ी प्रॉपर्टी खरीदते हैं। अब ऐसे खरीदार अपनी प्रॉपर्टी के निवेश की प्लानिंग इस तरह से कर सकते हैं कि उन्हें कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) में ज़्यादा से ज़्यादा छूट मिल सके।
ध्यान रखने योग्य बातें और चुनौतियां
हालांकि, टैक्स सलाहकारों का कहना है कि इस छूट का फायदा उठाने के लिए खरीदारों को यह साबित करना होगा कि फ्लैट्स को वाकई में संरचनात्मक (Structurally) रूप से जोड़ा गया है और वे एक ही घर की तरह इस्तेमाल हो रहे हैं। इसके लिए पुख्ता सबूत, जैसे निर्माण संबंधी कागजात और उपयोग का विवरण, बहुत ज़रूरी होंगे। टैक्स विभाग (Tax Department) इस तरह के मामलों की बारीकी से जांच कर सकता है, और अगर 'कार्यात्मक एकता' (Functional Unity) साबित नहीं होती, तो टैक्स देनदारियों (Tax Liabilities) का दोबारा आकलन (Reassessment) हो सकता है।
