मानसून सत्र से पहले सरकार की सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया। TMC के करीब 20 बागी सांसदों की मौजूदगी इस हंगामे की जड़ बनी, जो NCPI के बैनर तले आधिकारिक मान्यता की मांग कर रहे हैं।
सर्वदलीय बैठक में क्यों हुआ हंगामा?
आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सरकार और INDIA विपक्षी गठबंधन के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। यह विवाद सरकार के उस फैसले को लेकर था, जिसमें उसने राष्ट्रवादी कांग्रेस ऑफ प्रोग्रेसिव इंडिया (NCPI) नामक समूह बनाने वाले करीब 20 बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसदों को न्योता भेजा था।
सरकार का पक्ष और स्पीकर का फैसला
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि सभी संबंधित पक्षों को न्योता भेजना उनका कर्तव्य था। यह विवाद तब और बढ़ गया जब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने हाल ही में इन बागी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था का फैसला सुनाया। विपक्षी दलों ने इसे अंतिम निर्णय से पहले उनकी स्थिति को औपचारिक बनाने की ओर एक कदम के रूप में देखा।
विपक्षी दलों का विरोध
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK, JMM, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दल और शिवसेना (UBT) सहित कई प्रमुख विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने शुरुआत में प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर बैठक से वॉकआउट किया। सरकार के कदम के आलोचकों, जैसे CPM नेता जॉन ब्रिट्टस, ने निमंत्रण को एक प्रक्रियात्मक त्रुटि बताया, जबकि कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह विरोध स्पीकर के उस फैसले को चुनौती देने के लिए था, जिसमें उन्होंने बागी समूह की संसदीय ढांचे के भीतर अलग पहचान को मान्यता दी थी।
गतिरोध का समाधान?
हालांकि, बाद में विपक्षी सांसदों के सत्र में लौटने से गतिरोध कुछ हद तक कम हुआ। ऐसी रिपोर्टें हैं कि पार्टी के आंतरिक समीकरणों को लेकर व्यापक चिंताओं, विशेष रूप से शिवसेना (UBT) के सदस्यों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट में विलय के हालिया घटनाक्रमों के बाद यह वापसी हुई।
आगे क्या?
सरकार ने निमंत्रण की प्रक्रियात्मक आवश्यकता पर जोर दिया है, लेकिन NCPI की स्थिति अभी भी अनसुलझी है। समूह की आधिकारिक मान्यता के लिए औपचारिक अनुरोध वर्तमान में लोकसभा स्पीकर के समक्ष लंबित है। बाजार के जानकार और राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर नजर रखेंगे कि यह जारी बहस मानसून सत्र के दौरान विधायी एकजुटता और संभावित संसदीय व्यवधानों को कैसे प्रभावित करती है। NCPI की औपचारिक स्थिति के संबंध में स्पीकर का अंतिम निर्णय सत्र की कार्यवाही की निगरानी करने वाले हितधारकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अपडेट बना रहेगा।
