Homebuyers Gain Multi-Forum Legal Rights in Real Estate

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Homebuyers Gain Multi-Forum Legal Rights in Real Estate

अब भारतीय घर खरीदारों को रियल एस्टेट में न्याय पाने के लिए RERA, कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट और इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) जैसे कई कानूनी रास्ते मिले हैं। कोर्ट अब इन रास्तों को एक साथ इस्तेमाल करने की इजाजत दे रहे हैं, जिससे खरीदार फंसे हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करवाने या अपना पैसा वापस पाने के लिए कंज्यूमर या फाइनेंशियल क्रेडिटर के तौर पर क्लेम फाइल कर सकते हैं।

घर खरीदारों को मिली कानूनी राहत: अब कई फोरम पर लड़ सकेंगे केस

भारतीय रियल एस्टेट में घर खरीदारों के लिए कानूनी रास्ते और मजबूत हो गए हैं। ज्यूडिशियल क्लेरिफिकेशन (Judicial Clarification) की एक सीरीज के बाद, अब खरीदार डेवलपर्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए RERA, कंज्यूमर कोर्ट और इंसॉल्वेंसी ट्रिब्यूनल जैसे कई कानूनी फोरम पर जा सकते हैं। इससे पहले खरीदारों को किसी एक रास्ते पर ही निर्भर रहना पड़ता था। यह बदलाव यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि प्रोजेक्ट में देरी या फंड के गलत इस्तेमाल के मामलों में खरीदारों को कोई नुकसान न हो।

मल्टी-फोरम एक्सेस: कंज्यूमर से फाइनेंशियल क्रेडिटर तक का सफर

पहले घर खरीदारों को विवादों के लिए सही कानून चुनने में काफी अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था। अब, रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट (RERA) प्रोजेक्ट पूरा करवाने या जमा राशि वापस दिलाने जैसे मामलों के लिए मुख्य जरिया है। वहीं, कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट (CPA) के तहत खरीदार खराब सर्विस के लिए हर्जाना मांग सकते हैं। तीसरा बड़ा रास्ता, इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), घर खरीदारों को फाइनेंशियल क्रेडिटर मानता है। यह स्टेटस अहम है क्योंकि इससे खरीदार डिफॉल्ट करने वाले डेवलपर के खिलाफ इंसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स (Insolvency Proceedings) में हिस्सा ले सकते हैं, जिससे सिर्फ पैसे की रिकवरी से आगे बढ़कर कंपनी के समाधान की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: क्या अलग-अलग केस लड़ना संभव है?

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने साफ किया है कि ये कानूनी रास्ते एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। इसका मतलब है कि अगर कोई खरीदार RERA या CPA के तहत केस फाइल कर चुका है, तो भी उसे IBC ट्रिब्यूनल में जाने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि RERA से कोई डिक्री या ऑर्डर मिलने के बाद भी घर खरीदार IBC प्रक्रिया में शामिल होने पर किसी नुकसान में नहीं रहेगा। इससे यह सुनिश्चित होता है कि खरीदार के निवेश की सुरक्षा के लिए कानूनी उपाय बढ़ते रहें।

घर खरीदारों की कानूनी पहचान: कंज्यूमर या क्रेडिटर?

यह मल्टी-फोरम एक्सेस सुरक्षा बढ़ाता है, लेकिन चुने गए रास्ते के आधार पर घर खरीदार की कानूनी पहचान बदल जाती है। CPA के तहत, खरीदार को एक कंज्यूमर माना जाता है, जबकि IBC के तहत उन्हें फाइनेंशियल क्रेडिटर के तौर पर पहचाना जाता है। कोर्ट अब इन कानूनों की 'सामंजस्यपूर्ण व्याख्या' (Harmonious Interpretation) को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसका अर्थ है कि ट्रिब्यूनल राहत देने के लिए विवाद के इरादे को देखेंगे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि अदालतों को वास्तविक घर खरीदारों, जो पजेशन (Possession) या रिफंड (Refund) चाहते हैं, और सट्टेबाजी करने वाले निवेशकों, जो इन कानूनों का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए कर रहे हैं, के बीच अंतर करना चाहिए।

निवेशकों और घर खरीदारों के लिए, आगे यह देखना अहम होगा कि ये ट्रिब्यूनल अपने कार्यों में कैसे समन्वय बिठाते हैं। जैसे-जैसे NCLT और RERA अथॉरिटीज में अधिक मामले आगे बढ़ेंगे, विभिन्न राज्यों में इन फैसलों की एकरूपता रियल एस्टेट सेक्टर और इसमें निवेश करने वाले व्यक्तियों, दोनों के लिए एक अनुमानित माहौल बनाने में महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

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