गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट मामले में 38 दोषियों की मौत की सज़ा और 11 अन्य की उम्रकैद की सज़ा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने सभी दोषियों की अपीलों को खारिज कर दिया है, जिससे 2022 के विशेष अदालत के फैसले की पुष्टि हो गई है।
2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट मामले में अपना फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति ए.वाई. कोगजे और न्यायमूर्ति समीर जे. दवे की खंडपीठ ने मामले के 38 दोषियों की मौत की सज़ा को बरकरार रखा है। इसके साथ ही, कोर्ट ने 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सज़ा को भी हरी झंडी दे दी है।
सभी अपीलों को किया खारिज
हाई कोर्ट ने सभी दोषियों द्वारा दायर की गई अपीलों को खारिज कर दिया है, जिससे 2022 में विशेष अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले को मजबूती मिली है। यह फैसला आतंकवाद के उस भयानक कृत्य के संबंध में कानूनी कार्यवाही के अंतिम परिणामों की पुष्टि करता है जिसने शहर को झकझोर दिया था।
क्या थी घटना?
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में विभिन्न स्थानों पर, जिनमें अस्पताल भी शामिल थे, सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन हमलों में 56 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इन हमलों की ज़िम्मेदारी उस समय इंडियन मुजाहिदीन नामक आतंकवादी समूह ने ली थी।
विशेष अदालत का फैसला
2022 में सुनाए गए शुरुआती फैसले में, एक विशेष अदालत ने 77 आरोपियों में से 49 को दोषी पाया था। वहीं, 28 लोगों को आरोपों से बरी कर दिया गया था, जबकि एक व्यक्ति ने अभियोजन के लिए स्वीकारोक्ति की थी।
