गुजरात हाई कोर्ट ने NCLT प्रेसिडेंट के अधिकार सीमित किए, एस्सार स्टील ट्रांसफर रद्द

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AuthorWhalesbook News Team|Published at:
गुजरात हाई कोर्ट ने NCLT प्रेसिडेंट के अधिकार सीमित किए, एस्सार स्टील ट्रांसफर रद्द
Overview

गुजरात हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का प्रेसिडेंट किसी भी NCLT बेंच के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र को बदल या बढ़ा नहीं सकता। कोर्ट ने एस्सार स्टील से संबंधित मामलों को अहमदाबाद बेंच से मुंबई बेंच में ट्रांसफर करने का आदेश रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि प्रेसिडेंट का अधिकार समान अधिकार क्षेत्र के भीतर ही सीमित है। यह निर्णय आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया लिमिटेड की याचिकाओं पर आधारित है और इसमें NCLT बेंचों को वकील या वादी के आचरण के कारण खुद को अलग (recuse) करने से बचने की सलाह भी दी गई है।

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गुजरात हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के प्रेसिडेंट के पास किसी भी NCLT बेंच के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (territorial jurisdiction) को बदलने या बढ़ाने की प्रशासनिक शक्ति नहीं है। जस्टिस निरल आर मेहता द्वारा दिए गए इस ऐतिहासिक फैसले ने NCLT अहमदाबाद बेंच से NCLT मुंबई बेंच में एस्सार स्टील से जुड़े मामलों के ट्रांसफर को रद्द कर दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NCLT रूल्स, 2016 के रूल 16(d) के तहत प्रेसिडेंट का अधिकार केवल समान क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर ट्रांसफर तक ही सीमित है और इसका इस्तेमाल अधिकार क्षेत्र के पार मामले ले जाने के लिए नहीं किया जा सकता। यह फैसला आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर याचिकाओं के जवाब में आया, जिसमें कंपनी ने ट्रांसफर आदेश को चुनौती दी थी क्योंकि अहमदाबाद की दो बेंचों ने मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। कंपनी ने आरोप लगाया था कि ट्रांसफर 'बेंच हंटिंग' और 'फोरम शॉपिंग' का परिणाम थे।

हाई कोर्ट ने सभी पांचों विवादित आदेशों को खारिज कर दिया और NCLT प्रेसिडेंट को निर्देश दिया कि वह मामलों को अहमदाबाद बेंच को पुनः आवंटित करे या यदि आवश्यक हो, तो त्वरित न्याय के लिए एक वर्चुअल बेंच का गठन करे। कोर्ट ने NCLT बेंचों को केवल वकीलों या वादियों के आचरण के कारण खुद को अलग करने से बचने की चेतावनी भी दी, और इसके बजाय न्यायिक गरिमा और स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए कदाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की सलाह दी।

प्रभाव: यह निर्णय NCLT के भीतर अधिकार क्षेत्र की सीमाओं और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता को मजबूत करता है। इसका उद्देश्य मामलों के मनमाने हस्तांतरण और हेरफेर को रोकना है, जिससे कंपनियों और निवेशकों के लिए कॉर्पोरेट दिवालियापन और अन्य NCLT प्रक्रियाओं में अधिक पूर्वानुमान लाया जा सके।
रेटिंग: 6/10।

कठिन शब्द:
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT): भारत में एक अर्ध-न्यायिक निकाय जो कंपनियों से संबंधित, जिसमें दिवाला और दिवालियापन की कार्यवाही शामिल है, का निर्णय करता है।
क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (Territorial Jurisdiction): वह भौगोलिक क्षेत्र या विशिष्ट क्षेत्र जिस पर एक अदालत या न्यायाधिकरण के पास मामलों की सुनवाई और निर्णय लेने का कानूनी अधिकार होता है।
रद्द करना (Quashing): किसी पिछली कानूनी निर्णय या आदेश को आधिकारिक तौर पर अमान्य या शून्य करना।
बेंच हंटिंग (Bench Hunting): ऐसे न्यायाधीशों या बेंचों की तलाश का अभ्यास जो कानून के कुछ परिणामों या व्याख्याओं का पक्ष लेते हों।
फोरम शॉपिंग (Forum Shopping): अनुकूल निर्णय प्राप्त करने के लिए सक्षम अधिकार क्षेत्रों के चयन से एक अदालत या न्यायाधिकरण का चयन करने का अभ्यास।
अलग हो जाना (Recused): जब कोई न्यायाधीश या न्यायाधिकरण सदस्य किसी मामले से अयोग्य घोषित हो जाता है, आमतौर पर हितों के टकराव या कथित पूर्वाग्रह के कारण।
न्यायिक समीक्षा (Judicial Review): अदालतों की वह शक्ति जो सरकार की विधायी, कार्यकारी और प्रशासनिक शाखाओं के कार्यों की जांच करती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे संवैधानिक और कानूनी हैं।
परिचालन लेनदार (Operational Creditors): ऐसे पक्ष जिन्होंने किसी कंपनी को सामान या सेवाएं प्रदान की हैं और उनके भुगतान के लिए बकाया हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.