गाजा के कमाल अदवान अस्पताल के निदेशक डॉ. हुसाम अबू सफीया इजरायली सुप्रीम कोर्ट में वीडियो लिंक के ज़रिए पेश हुए। गैरकानूनी लड़ाका कानून के तहत 500 दिनों से अधिक समय से हिरासत में, उन पर दुर्व्यवहार के आरोप हैं, जबकि उनके कानूनी दल और अंतर्राष्ट्रीय निकाय उनकी रिहाई की वकालत कर रहे हैं।
क्या हुआ?
गाजा के कमाल अदवान अस्पताल के निदेशक, डॉ. हुसाम अबू सफीया, बुधवार को इजरायली सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वीडियो लिंक के माध्यम से पेश हुए। यह सुनवाई बिना किसी औपचारिक आरोप के 500 दिनों से अधिक की हिरासत के बाद हुई। कार्यवाही के दौरान, डॉ. अबू सफीया को वीडियो पर देखा गया। उनके कानूनी प्रतिनिधियों और परिवार की रिपोर्टों के अनुसार, वह शारीरिक रूप से काफी कमजोर दिखाई दे रहे थे। उनकी बचाव टीम ने हिरासत के दौरान उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं, और उनकी वर्तमान स्थिति को गंभीर दुर्व्यवहार का प्रमाण बताया है।
कानूनी संदर्भ
डॉ. अबू सफीया को इज़राइल के 'गैरकानूनी लड़ाका कानून' (Unlawful Combatant Law) के तहत हिरासत में रखा गया है, जो 2002 में लागू किया गया था। यह कानून व्यक्तियों को औपचारिक आपराधिक आरोप लगाए बिना हिरासत में रखने की अनुमति देता है और ऐसे ढांचे प्रदान करता है जो आमतौर पर बंदियों को मिलने वाली कई सुरक्षाओं को हटा देते हैं। इस कानूनी स्थिति के तहत, राज्य व्यक्तियों को विस्तारित अवधि के लिए हिरासत में रख सकता है, और अदालत वर्तमान में उनकी हिरासत की निरंतरता की समीक्षा कर रही है। उनकी संभावित रिहाई या हिरासत जारी रखने के संबंध में निर्णय आने वाले दिनों में अपेक्षित है।
हिरासत की पृष्ठभूमि
डॉ. अबू सफीया को 27 दिसंबर, 2024 को इजरायली सेना ने कमाल अदवान अस्पताल में छापा मारने के दौरान पकड़ा था। गिरफ्तारी से पहले, बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने क्षेत्र में चल रहे सैन्य अभियानों के बावजूद मरीजों की देखभाल के लिए सुविधा में बने रहने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए सार्वजनिक ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने गाजा में चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति के बारे में भी सार्वजनिक रूप से बात की थी। उनके कानूनी वकील ने बताया है कि उन्हें नफ्खा जेल (Nafha Prison) में एकांत कारावास में रखा गया है और आरोप लगाया है कि उन्हें पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए आवश्यक चिकित्सा उपचार से वंचित रखा गया है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
डॉ. अबू सफीया के मामले ने अंतर्राष्ट्रीय मानवीय संगठनों का ध्यान आकर्षित किया है। संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति ने पहले भी उनकी रिहाई की मांग की है। इन संगठनों ने उनके स्वास्थ्य संबंधी आरोपों का दस्तावेजीकरण किया है, जिसमें गंभीर वजन घटना, त्वचा संक्रमण और चिकित्सा देखभाल से इनकार शामिल है। ये निकाय स्थिति की निगरानी करना जारी रखे हुए हैं, सक्रिय संघर्ष क्षेत्रों में चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा को लेकर व्यापक चिंताओं को उजागर कर रहे हैं। अदालत का आगामी निर्णय वह मुख्य विकास है जिस पर पर्यवेक्षक और मानवीय समूह नज़र रख रहे हैं।
