श्रीलंका ईस्टर बम धमाके: पूर्व पुलिस प्रमुख मौत की सजा के खिलाफ करेंगे अपील

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
श्रीलंका ईस्टर बम धमाके: पूर्व पुलिस प्रमुख मौत की सजा के खिलाफ करेंगे अपील

श्रीलंका के पूर्व पुलिस महानिदेशक पुजिथ जयसुंदरा 2019 के ईस्टर बम धमाकों से संबंधित मौत की सजा के खिलाफ अपील करने की योजना बना रहे हैं। इस कानूनी मामले में पूर्व रक्षा सचिव हेमासिरी फर्नांडो भी शामिल हैं, और यह मामला खुफिया रिपोर्टों पर कार्रवाई करने में विफलता पर केंद्रित है। हालांकि, देश में मृत्युदंड पर लंबे समय से चल रहे स्थगन के कारण परिणाम जटिल बना हुआ है।

मौत की सजा के खिलाफ अपील

श्रीलंका के पूर्व पुलिस महानिदेशक (Inspector General of Police), पुजिथ जयसुंदरा, ने शुक्रवार को सुनाई गई मौत की सजा को चुनौती देने की घोषणा की है। यह सजा 2019 के ईस्टर रविवार को हुए बम धमाकों के संबंध में आपराधिक कर्तव्य की उपेक्षा के लिए सुनाई गई है, जिसमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ था। रक्षा मंत्रालय के पूर्व शीर्ष नौकरशाह हेमासिरी फर्नांडो को भी इसी फैसले में मौत की सजा सुनाई गई है।

खुफिया विफलता और कानूनी सफर

इस सजा का मुख्य आधार यह है कि इन अधिकारियों ने संभावित हमलों के बारे में भारतीय एजेंसियों से विशिष्ट खुफिया चेतावनियां मिलने के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं की। यह मामला एक लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरा है। दोनों व्यक्तियों पर शुरू में नवंबर 2021 में आरोप तय किए गए थे और फरवरी 2022 में सभी 855 आरोपों से बरी कर दिया गया था। हालांकि, अटॉर्नी जनरल ने इस बरी होने को चुनौती दी, जिसके कारण नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने कार्यवाही को फिर से शुरू कर दिया। अभियोजन पक्ष ने सफलतापूर्वक तर्क दिया कि प्रारंभिक सुनवाई में बचाव पक्ष के गवाहों पर ठीक से विचार नहीं किया गया था।

अपील की प्रक्रिया और मृत्युदंड का स्थगन

बचाव पक्ष के वकील रोहन देहिवेला ने पुष्टि की है कि कानूनी टीमें अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार कर रही हैं। हालांकि सजा गंभीर है, लेकिन इसका व्यावहारिक कार्यान्वयन श्रीलंका के एक अद्वितीय कानूनी वातावरण के अधीन है। देश 1976 से मृत्युदंड पर स्थगन (moratorium) बनाए हुए है, जिसका अर्थ है कि कभी-कभी मौत की सजा सुनाई जाती है, लेकिन वर्तमान में राज्य द्वारा इन्हें अमल में नहीं लाया जा रहा है।

आगे क्या?

जयासंदरा और फर्नांडो दोनों 2016 और 2019 के बीच अपने-अपने पदों पर थे। 2019 के हमलों के बाद, उन्हें गिरफ्तार किया गया और 2023 में जमानत मिलने से पहले चार महीने से अधिक समय तक हिरासत में रहे। जैसे-जैसे अपील प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, मुख्य ध्यान खुफिया जानकारी एकत्र करने की अवधि के दौरान उनकी आधिकारिक जिम्मेदारियों की व्याख्या और हालिया सजा की प्रक्रियात्मक वैधता पर होगा। अगली महत्वपूर्ण अपडेट अपील की औपचारिक फाइलिंग और सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित तारीख होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.