प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल में कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले के सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक मदन मित्रा को पूछताछ के लिए समन भेजा है। उन्हें 29 जुलाई को ED के कोलकाता स्थित कार्यालय में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
Detailed Coverage
क्या है भर्ती घोटाला?
यह मामला पश्चिम बंगाल के कई नगर निकायों में नौकरी के बदले रिश्वत लेने और अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ निकायों, जैसे कमारहाटी और टीटागढ़ नगर पालिका में, पैसे और सोने के बदले अवैध तरीके से लोगों को नौकरियां दी गईं। ED इस मामले की जांच मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act) के तहत कर रही है।
परिवार की भी हो चुकी है जांच
ED पहले भी विधायक मदन मित्रा के परिवार से जुड़े लोगों से पूछताछ कर चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी पत्नी अर्चना मित्रा और दोनों बेटे स्वरूप और शुभ्रप मित्रा से विभिन्न बैंक दस्तावेज़ जमा करने को कहा गया था। ऐसी जानकारी है कि इन वित्तीय रिकॉर्डों की जांच के दौरान कुछ ऐसे ट्रांजैक्शन सामने आए हैं, जिनके बारे में ED विधायक से सीधे स्पष्टीकरण चाहती है।
ED की छापेमारी और CBI का एंगल
ED ने 13 जून 2026 को विधायक से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। इन जगहों में भवनपुर, कालीघाट, दक्षिणेश्वर, संतोषपुर, जोका और बेलेघाटा जैसे इलाकों में उनके आवास और अन्य संपत्तियां शामिल थीं। यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा अक्टूबर 2025 में मित्रा के आवास पर की गई तलाशी के बाद शुरू हुई है। ED की वर्तमान जांच CBI द्वारा दर्ज किए गए मामलों पर ही आधारित है।
आगे क्या?
ED इस मामले में नगर निकायों में हुई नियुक्तियों से संबंधित दस्तावेजी और वित्तीय सबूतों का विश्लेषण जारी रखे हुए है। इस तरह की जांच से सरकारी परियोजनाओं या नगर निकायों से जुड़े अनुबंधों वाली कंपनियों के लिए प्रशासनिक मंजूरी में देरी या नीतियों में बदलाव की आशंका बनी रहती है। फिलहाल, सभी की निगाहें 29 जुलाई को होने वाली पूछताछ और उसके बाद ED के अगले कदमों पर टिकी हैं।
