$2.03 अरब की हेराफेरी: ED ने टेक फाउंडर दुग्गल पर कसा शिकंजा
Directorate of Enforcement (ED) ने ब्रिटिश नागरिक सचिन देव दुग्गल के खिलाफ एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट (supplementary chargesheet) फाइल की है. दुग्गल पर आरोप है कि उन्होंने एक बड़ा और जटिल प्लान बनाकर Videocon Industries से करीब $2.03 अरब की रकम को निकाला और उसकी 'मनी लॉन्ड्रिंग' की.
सचिन देव दुग्गल, जो कि स्विस फर्म nHoldings SA के चेयरमैन हैं और टेक कंपनियों Nivio Technologies व Engineer.AI के बेनिफिशियल ओनर (beneficial owner) हैं, पर इल्ज़ाम है कि उन्होंने इंटरेस्ट-फ्री लोन (interest-free loan) और ऑफशोर एंटिटीज (offshore entities) की ओवर-वैल्यूड (over-valued) कीमतों के ज़रिए फंड्स को इधर-उधर किया। ED का कहना है कि दुग्गल ने कई समन (summons) के बावजूद जांच में सहयोग नहीं किया और केवल ईमेल के ज़रिए आंशिक जवाब दिए।
दुग्गल की टेक कंपनियों पर गहरा असर
इस मामले का सीधा असर दुग्गल से जुड़ी टेक कंपनियों पर भी पड़ा है. Nivio Technologies India Private Limited, जिसकी स्थापना 2008 में हुई थी, अब 'स्ट्रक ऑफ' (struck off) हो चुकी है, यानी अब वह सक्रिय नहीं है. वहीं, 2017 में स्थापित हुई Engineer.AI Global Limited, जो Builder.ai के नाम से जानी जाती है, उसकी पैरेंट कंपनी Builder.ai Corporation दिवालियापन (insolvency proceedings) की प्रक्रिया में है. यह तब हुआ जब कंपनी हाल ही में रेवेन्यू (revenue) और अच्छी फंडिंग (funding) का दावा कर रही थी.
Videocon ग्रुप का पुराना कर्ज का पहाड़
Videocon Group का इतिहास बड़े कर्ज़ (debt) और एग्रेसिव एक्सपेंशन (aggressive expansion) का रहा है. कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर्स (capital-intensive sectors) जैसे ऑयल, गैस और टेलीकॉम में विस्तार के बावजूद, इन वेंचर्स से पर्याप्त रिटर्न नहीं मिला, जिससे भारी कर्ज जमा हो गया. 2017 तक Videocon पर उसकी मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (market capitalization) से 11 गुना ज़्यादा कर्ज़ था. कंपनी 2018 में इंसॉल्वेंसी (insolvency) के लिए फाइल हुई, जिस पर $9 अरब से ज़्यादा के क्लेम थे, यह भारत के सबसे बड़े इंसॉल्वेंसी केस में से एक था.
बढ़ती रेगुलेटरी स्क्रूटनी (Regulatory Scrutiny)
ED की यह कार्रवाई, दुनिया भर में फाइनेंशियल इरेगुलरिटीज़ (financial irregularities) के खिलाफ बढ़ते रेगुलेटरी एक्शन (regulatory action) को दर्शाती है, खासकर टेक्नोलॉजी और फिनटेक सेक्टर में. टेक स्टार्टअप्स के फाउंडर्स अक्सर फाइनेंशियल डेटा को गलत बताने, निवेशकों को धोखा देने या मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के सही इंतज़ाम न करने जैसे आरोपों का सामना कर रहे हैं.
ऑफशोर स्ट्रक्चर्स (Offshore Structures) का इस्तेमाल
यह मामला nHoldings SA जैसी स्विस ऑफशोर एंटिटीज (offshore entities) के इस्तेमाल पर भी रोशनी डालता है. ऐसी एंटिटीज टैक्स के फायदे और जटिल फाइनेंशियल चेन बनाने में मदद करती हैं, जिससे असली फायदे के मालिक और पैसे के अंतिम उपयोग को छिपाना आसान हो जाता है. हालांकि ये लीगल हैं, लेकिन ये फंड्स की मूवमेंट को फैसिलिटेट कर सकती हैं और कैपिटल फ्लाइट (capital flight) व रेगुलेटरी से बचने की चिंताओं को बढ़ा सकती हैं.
