धर्मस्थला, कर्नाटक में दफनाने के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपना काम पूरा कर लिया है। टीम ने करीब 7,000 पन्नों की रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर दी है, जिसके बाद अब अदालत इस मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगी।
सालों की जांच पर लगा विराम
धर्मस्थला में दफनाने को लेकर चल रहे विवादों और आरोपों की जांच के लिए गठित की गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी एक साल लंबी जांच खत्म कर दी है। टीम ने एक विशाल रिपोर्ट, जिसमें लगभग 7,000 पन्ने हैं, कोर्ट में पेश की है। इस रिपोर्ट में जांच के दौरान मिले सभी सबूत भी शामिल किए गए हैं, जिन्हें अब अदालत अपनी निगरानी में लेगी।
क्या थे आरोप?
यह जांच कर्नाटक सरकार ने तब शुरू की थी जब एक पूर्व सफाई कर्मचारी, सी.एन. चिनय्या ने आरोप लगाया था कि 1995 से 2014 के बीच उसने महिलाओं और नाबालिगों के शवों को अवैध तरीके से ठिकाने लगाने में मदद की है। उनका दावा था कि ये लोग गंभीर अपराधों के शिकार हुए थे। इन गंभीर आरोपों के बाद इलाके में सालों से हो रही मौतों और गुमशुदगी की घटनाओं की जांच के लिए 20 सदस्यों की एक टीम बनाई गई थी।
जांच में सामने आई परतें
जांच के दौरान SIT ने 15 जगहों पर खुदाई की और वहां से मिले जैविक नमूनों और मिट्टी के सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे। हालांकि, जांच आगे बढ़ी तो सफाई कर्मचारी के बयानों में कई विरोधाभास मिले, जिसके चलते उसे झूठी गवाही देने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया। बाद में, उस व्यक्ति ने कर्नाटक हाई कोर्ट में अर्जी देकर कहा कि उस पर बाहरी लोगों द्वारा झूठे आरोप लगाने का दबाव बनाया गया था, और उसे मंगलुरु की एक अदालत से जमानत भी मिल गई थी।
अब कोर्ट के फैसले का इंतजार
इन सब घटनाक्रमों को देखते हुए, अब पूरा मामला और जांच के निष्कर्ष अदालत के विवेक पर निर्भर करते हैं। अदालत SIT की रिपोर्ट और सबूतों की बारीकी से समीक्षा करेगी ताकि आरोपों की सच्चाई का पता लगाया जा सके और आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जा सके। मामले से जुड़े सभी पक्ष अब कोर्ट में इस 7,000 पन्नों की रिपोर्ट की समीक्षा का इंतजार कर रहे हैं।
