दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत निवारक हिरासत शक्तियों का हालिया विस्तार एक मानक तिमाही नवीनीकरण है। अधिकारियों ने बताया कि यह आदेश 7 जुलाई को जारी किया गया था, जो जंतर-मंतर पर हालिया विरोध प्रदर्शनों से काफी पहले का है, और उन्होंने इस कदम को NEET परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शनकारियों को लक्षित करने के दावों को खारिज कर दिया।
Detailed Coverage
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत निवारक हिरासत (Preventive Detention) शक्तियों के विस्तार को लेकर दिल्ली पुलिस ने एक औपचारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। यह स्पष्टीकरण उन खबरों के जवाब में आया है जिनमें इस कदम को जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जोड़ा जा रहा था। पुलिस के आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह आदेश हर तीन महीने में होने वाली एक मानक प्रशासनिक नवीनीकरण (Administrative Renewal) प्रक्रिया का हिस्सा है।
NSA आदेश की समय-सीमा
पुलिस ने बताया कि मौजूदा विस्तार को आधिकारिक तौर पर 7 जुलाई को मंजूरी दी गई थी, जो 19 जुलाई से 18 अक्टूबर तक प्रभावी है। यह समय-सीमा 'सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों से पहले की है। ये प्रदर्शन 20 जून से NEET परीक्षा अनियमितताओं के लिए जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुए थे। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यह नवीनीकरण प्रक्रिया एक नियमित प्रशासनिक कार्य है और इसका किसी भी मौजूदा आंदोलन या सार्वजनिक प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को समझना
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) एक ऐसा कानून है जो केंद्र और राज्य सरकारों को उन व्यक्तियों के खिलाफ निवारक हिरासत का आदेश देने का अधिकार देता है, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा, देश की रक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए संभावित खतरा माना जाता है। इस कानून के तहत, तीन से 12 महीने तक की अवधि के लिए हिरासत में लिया जा सकता है। कानून में एक सलाहकार बोर्ड द्वारा अनिवार्य समीक्षा प्रक्रिया भी शामिल है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रक्रियात्मक निगरानी बनी रहे।
हालिया प्रदर्शनों का संदर्भ
NSA नवीनीकरण पर सार्वजनिक चर्चा तब तेज हुई जब एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी जैसे राजनीतिक हस्तियों ने आरोप लगाया कि इस उपाय का इस्तेमाल NEET पेपर लीक विवाद के आसपास के असंतोष को संबोधित करने के लिए किया जा रहा है। जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों में सोनम वांगचुक जैसे विभिन्न कार्यकर्ता शामिल रहे हैं, और यहां तनाव बढ़ा है। पुलिस का कहना है कि प्रशासनिक आदेश की गलत व्याख्या बाहरी पर्यवेक्षकों द्वारा की गई है।
