दिल्ली पुलिस ने नकली नोटों के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। नवी मुंबई से 299 जाली नोट और प्रिंटिंग का सामान जब्त किया गया है, साथ ही तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस गिरोह में एक मास्टरमाइंड और एक टेक्निकल एक्सपर्ट भी शामिल है।
नकली नोटों का रैकेट हुआ ख़त्म
दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराज्यीय नकली करेंसी रैकेट का सफलतापूर्वक सफाया कर दिया है। मुंबई पुलिस के सहयोग से चलाए गए इस ऑपरेशन में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और नवी मुंबई में चल रही एक गुप्त प्रिंटिंग यूनिट का भी पर्दाफाश हुआ है।
कैसे हुआ खुलासा?
यह पूरा मामला 29 जून 2026 को शुरू हुआ, जब दिल्ली के भलस्वा डेयरी इलाके में एक दुकानदार को ग्राहक द्वारा दिए गए नोटों पर शक हुआ। दुकानदार ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। जांच में नोट नकली पाए गए और पुलिस ने उस व्यक्ति, 62 वर्षीय नटराज मोहन कंचन को पकड़ा, जिसके पास से 96 नकली 100 रुपये के नोट बरामद हुए।
मास्टरमाइंड और एक्सपर्ट गिरफ्तार
कंचन की गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने दिल्ली में सप्लाई चेन का पता लगाया और 30 जून 2026 को सुभाष चंद्र को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि इस गिरोह की जड़ें महाराष्ट्र तक फैली हुई हैं। इसके बाद, 13 जुलाई 2026 को नवी मुंबई रेलवे स्टेशन पर 38 वर्षीय विनोद मुन्निलाल जायसवाल को पकड़ा गया। जायसवाल पर आरोप है कि वह कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके नकली नोटों के डिजाइन बनाने वाला टेक्निकल मास्टरमाइंड है।
क्या-क्या जब्त हुआ?
छापेमारी के दौरान, पुलिस ने कंचन के नवी मुंबई वाले घर से भारी मात्रा में प्रिंटिंग और लैमिनेशन उपकरण जब्त किए, जिनमें लैपटॉप, हाई-एंड प्रिंटर और विशेष वॉटरमार्क वाले कागज शामिल हैं। कुल मिलाकर, पुलिस ने अलग-अलग मूल्य के 299 नकली नोट जब्त किए हैं। पुलिस अभी भी इस मामले की जांच कर रही है ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके और अन्य साथियों की पहचान की जा सके। यह घटना आम जनता और व्यापारियों के लिए एक चेतावनी है कि वे नकदी का लेन-देन करते समय विशेष सावधानी बरतें।
