Philips को बड़ा झटका! दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला - पेटेंट इस्तेमाल का सबूत देना ही होगा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Philips को बड़ा झटका! दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला - पेटेंट इस्तेमाल का सबूत देना ही होगा
Overview

दिल्ली हाई कोर्ट ने DVD पेटेंट विवाद में Koninklijke Philips Electronics NV के रॉयल्टी क्लेम को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि पेटेंट धारकों को यह साबित करना होगा कि उनकी टेक्नोलॉजी का असल में इस्तेमाल हुआ है, न कि सिर्फ इतना कि वह किसी प्रोडक्ट स्टैंडर्ड के लिए जरूरी थी। इस फैसले से DVD निर्माताओं KK Bansal और Rajesh Bansal को रॉयल्टी देनी होगी, जैसा कि 2018 के एक फैसले में कहा गया था।

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कोर्ट की सख़्त हिदायत: पेटेंट के इस्तेमाल का सबूत लाओ!

दिल्ली हाई कोर्ट ने Koninklijke Philips Electronics NV को DVD पेटेंट केस में बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने कंपनी के रॉयल्टी मांगने के दावे को ठुकरा दिया है। जस्टिस हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिविजन बेंच ने कहा कि कोई भी पेटेंट मालिक सिर्फ इस आधार पर रॉयल्टी नहीं मांग सकता कि उसका पेटेंट किसी प्रोडक्ट स्टैंडर्ड के लिए जरूरी है। सबसे ज़रूरी बात, पेटेंट होल्डर को ठोस सबूत पेश करने होंगे कि दूसरे पक्ष ने असल में उनकी पेटेंटेड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है।

2018 के फैसले पर पलटवार

यह फैसला 2018 के उस निर्णय के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें KK Bansal और Rajesh Bansal को, जो Mangalam Technology और Bhagirathi Electronics से जुड़े हैं, Philips को भारी रॉयल्टी और हर्जाना देने का आदेश दिया गया था। यह पूरा मामला Indian Patent IN 184753 को लेकर था, जो DVD प्लेयर के अंदर एक डीकोडिंग डिवाइस से जुड़ा था, जो डिस्क की जानकारी पढ़ने के लिए ज़रूरी है। Philips का कहना था कि यह एक स्टैंडर्ड एसेंशियल पेटेंट (SEP) है, जिसका मतलब है कि स्टैंडर्ड फॉलो करने वाले हर DVD प्लेयर में उनकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ज़रूर होगा।

बंसल बंधुओं का बचाव और पेटेंट की समाप्ति का सिद्धांत

बंसल बंधुओं ने सफलतापूर्वक यह तर्क दिया कि उन्होंने MediaTek चिप वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड अधिकृत डीलरों Shuntak और Sheen Land से खरीदे थे। कोर्ट ने उनकी बात मानी और कहा कि MediaTek इन खास बोर्डों का अधिकृत डीलर था। इसके अलावा, कोर्ट ने पेटेंट एक्ट की धारा 107A(b) के तहत पेटेंट समाप्ति (Patent Exhaustion) के सिद्धांत का भी हवाला दिया, जिससे पता चलता है कि पेटेंटेड वस्तु के पहली बार बिकने के बाद Philips के विशेष अधिकार खत्म हो गए थे।

FRAND रेट्स पर सबूत नहीं

डिवीजन बेंच ने यह भी पाया कि Philips द्वारा मांगे गए रॉयल्टी रेट्स किसी सबूत पर आधारित नहीं थे। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि Philips ने किसी तीसरे पक्ष के साथ किसी भी लाइसेंसिंग एग्रीमेंट को पेश करने में असफलता दिखाई, जबकि एक गवाह ने ऐसे दस्तावेज़ों के होने का दावा किया था। जजों ने Philips की दलील पर भी सवाल उठाए कि रॉयल्टी पूरे DVD प्लेयर के आधार पर कैलकुलेट की जानी चाहिए, क्योंकि पेटेंट केवल डीकोडिंग डिवाइस के लिए था, न कि पूरे प्रोडक्ट के लिए। नतीजतन, बंसल बंधुओं की अपील मंजूर कर ली गई और पिछले सिंगल-जज के फैसले को रद्द कर दिया गया।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.