Tahir Hussain Bail Plea: दिल्ली HC ने Delhi Police से मांगा जवाब, 87 दिन की देरी पर भी होगी सुनवाई

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Tahir Hussain Bail Plea: दिल्ली HC ने Delhi Police से मांगा जवाब, 87 दिन की देरी पर भी होगी सुनवाई

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दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत अर्जी पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है, साथ ही अपील दायर करने में हुई 87 दिन की देरी को माफ करने की अर्जी पर भी विचार कर रहा है।

क्या हुआ?

दिल्ली हाई कोर्ट इस वक्त ताहिर हुसैन, जो 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी हैं, की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रहा है। एक वेकेशन बेंच, जिसमें जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन शामिल हैं, ने दिल्ली पुलिस को एक औपचारिक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्तों का समय दिया है।

कानूनी पहलू

यह अर्जी 29 जनवरी के उस फैसले के बाद आई है जब एक एडिशनल सेशंस जज ने जमानत की अर्जी खारिज कर दी थी। उस निचली अदालत के फैसले में, जज समीर बाजपेयी ने कहा था कि वह सिर्फ इसलिए जमानत नहीं दे सकते क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले के अन्य सह-आरोपियों को राहत दी है। जज ने जोर दिया था कि अदालत को हर व्यक्ति के खिलाफ मौजूद सबूतों का अलग-अलग मूल्यांकन करना चाहिए कि क्या प्रथम दृष्टया मामला बनता है, न कि दूसरे अभियुक्तों के लिए तय की गई मिसालों पर निर्भर रहना चाहिए।

फाइलिंग में देरी

हाल की सुनवाई के दौरान, दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल SV राजू की कानूनी टीम ने एक प्रक्रियात्मक देरी की ओर इशारा किया। अपील 87 दिनों की देरी से दायर की गई थी। हुसैन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव मोहन ने इस समय अंतराल को स्वीकार किया और अदालत से देरी को माफ करने का अनुरोध किया है। यह अपीलीय अदालतों में एक मानक प्रक्रियात्मक बाधा है, जहां बेंच को जमानत के लिए दलीलें सुनने से पहले देर से प्रस्तुति के बावजूद अपील स्वीकार करने या न करने का फैसला करना होता है।

UAPA का आवेदन

यह मामला गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के लागू होने के कारण महत्वपूर्ण है। यह कानून साजिश और आतंकवादी गतिविधियों से संबंधित आरोपों वाले मामलों के लिए बनाया गया है। इस कानून की सख्त प्रकृति के कारण, जमानत पाने के लिए कानूनी सीमा आम तौर पर ऊंची होती है। अदालत की जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या अभियोजन पक्ष ने अभियुक्त के खिलाफ मामला स्थापित करने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश की है।

निवेशकों और पाठकों को क्या देखना चाहिए?

इस कानूनी प्रक्रिया में अगला कदम पुलिस का जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद हाई कोर्ट 87 दिनों की देरी को माफ करने के अनुरोध का मूल्यांकन करेगा। यदि अदालत अपील स्वीकार करने का फैसला करती है, तो जमानत अर्जी पर मुख्य दलीलें आगे बढ़ेंगी। इच्छुक दर्शक कानूनी कार्यवाही की प्रगति को समझने के लिए इन फाइलिंग की समय-सीमा पर नजर रख सकते हैं।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.