दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसे मामले में जांच के आदेश दिए हैं, जहाँ पुलिस अधिकारी ने कोर्ट से मिली छूट के बावजूद एक आरोपी को गिरफ्तार करने की कोशिश की। यह मामला नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के **25,000** अनलिस्टेड शेयरों के सौदे से जुड़ा है, जिसकी कीमत **₹5.63 करोड़** बताई जा रही है।
अदालत ने उठाए सवाल, क्यों हुई गिरफ्तारी की कोशिश?
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने यह जानने के लिए जांच के आदेश दिए हैं कि कैसे एक पुलिस अधिकारी ने तब गिरफ्तारी की कोशिश की, जब आरोपी को कोर्ट से पहले ही राहत मिली हुई थी। कोर्ट ने पाया कि मुंबई में आरोपी, अमित जैन, की तलाशी और गिरफ्तारी के लिए अनुमति मांगी गई थी, जबकि कोर्ट ने उसे पहले ही अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी थी।
जज के सामने क्या था मामला?
जस्टिस प्रतीक जालान ने बताया कि गिरफ्तारी की मंजूरी 8 मई, 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांगी गई और मिल भी गई। यह सब तब हुआ जब अमित जैन की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही थी और कोर्ट ने स्पष्ट रूप से उसे राहत दी थी। बाद में 14 मई के एक और आदेश से यह सुरक्षा और मजबूत हो गई थी। अब जांच यह पता लगाएगी कि इस मंजूरी की प्रक्रिया कैसे चली और इसे विभाग ने कैसे आगे बढ़ाया, जबकि आरोपी को कानूनी कवच प्राप्त था।
धोखाधड़ी का पूरा मामला
यह पूरा मामला 25,000 अनलिस्टेड नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) शेयरों के सौदे से जुड़ी धोखाधड़ी की शिकायत से शुरू हुआ। इन शेयरों का कुल मूल्य ₹5.63 करोड़ आंका गया है। सुनवाई के दौरान, आरोपी के वकील ने कुछ ऐसे दस्तावेज पेश किए, जिनमें राइट टू इंफॉर्मेशन (RTI) एक्ट के तहत मिली जानकारी भी शामिल थी, ताकि पुलिस के तरीके की वैधता को चुनौती दी जा सके।
आगे क्या होगा?
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को सूचित किया है कि आरोपी जांच में सहयोग तो कर रहा है, लेकिन कुछ जरूरी दस्तावेज ऐसे हैं जिनकी उन्हें अभी भी तलाश है। कोर्ट ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे इन लंबित दस्तावेजों की एक औपचारिक सूची दो दिनों के अंदर आरोपी को सौंपें। आरोपी के वकील ने भी पुष्टि की है कि अगर उनके मुवक्किल के पास वे दस्तावेज हुए तो उन्हें उपलब्ध करा दिया जाएगा।
शिकायतकर्ता को भी अतिरिक्त सबूत पेश करने की इजाजत मिल गई है। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई, 2026 को तय की गई है। इस दिन जांच की प्रगति और दस्तावेजों को सौंपने की प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। शेयर बाजार के जानकार ऐसे कानूनी मामलों पर कड़ी नजर रखते हैं, खासकर जब अनलिस्टेड सिक्योरिटीज के सौदे शामिल हों, क्योंकि ऐसे सौदों में पारदर्शिता और नियमों का पालन बहुत महत्वपूर्ण होता है।
