दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि जो कर्मचारी पहले दूरसंचार विभाग (DoT) में थे और अब भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) में स्थायी रूप से अवशोषित हो गए हैं, वे 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (7th CPC) के तहत पेंशन रिवीजन के हकदार नहीं होंगे। कोर्ट ने कहा कि ये रिटायर कर्मचारी PSU सर्विस रूल्स और इंडस्ट्रियल डियरनेस अलाउंस (IDA) व्यवस्था का पालन करेंगे, और ट्रिब्यूनल के पिछले आदेश को पलट दिया।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला शामिल थे, ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के सितंबर 2023 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सरकार को इन कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग के अनुसार पेंशन बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने साफ किया कि DoT से BSNL और MTNL में स्थायी रूप से अवशोषित हुए कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी नहीं रह जाते और वे सीधे तौर पर 7वें CPC के तहत पेंशन रिवीजन का दावा नहीं कर सकते।
BSNL और MTNL के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला इन सरकारी टेलीकॉम कंपनियों के लिए सेवा नियमों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवादों पर स्पष्टता लाता है। कोर्ट ने यह पुष्टि करके कि अवशोषित कर्मचारी सेंट्रल पे कमीशन की बजाय इंडस्ट्रियल डियरनेस अलाउंस (IDA) पे व्यवस्था के तहत आते हैं, केंद्र सरकार की नौकरी और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) सेवा की शर्तों के बीच के अंतर को मजबूत किया है। इससे सरकार या संबंधित PSU पर पेंशन देनदारियों का एक बड़ा बोझ बढ़ने की आशंका टल गई है।
रूल 37A के तहत कानूनी ढांचा
कोर्ट का यह निर्णय सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1972 के रूल 37A पर आधारित है। कोर्ट की व्याख्या के अनुसार, जब कोई कर्मचारी किसी PSU में स्थायी अवशोषण का विकल्प चुनता है, तो वह सरकारी कर्मचारी के दर्जे से बाहर हो जाता है। ऐसे में, उनका मूल सरकारी पद समाप्त कर दिया जाता है और वे पूरी तरह से PSU द्वारा परिभाषित वेतन संरचनाओं और पेंशन नीतियों के अधीन हो जाते हैं। इस फैसले से यह साफ होता है कि इन पेंशनरों के लिए IDA पे व्यवस्था ही मानक है, जिसका मतलब है कि पेंशन में संशोधन केंद्रीय वेतन आयोगों के बजाय PSU-विशिष्ट पे रिवीजन कमेटियों (PRC) द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
बिजनेस और वित्तीय संदर्भ
BSNL और MTNL ऐतिहासिक रूप से भारतीय टेलीकॉम बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण बड़े वित्तीय संकटों, उच्च ऋण स्तरों और परिचालन घाटे से जूझते रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन कंपनियों को वित्तीय दबावों से उबारने के लिए सरकार द्वारा कई पुनरुद्धार पैकेज शुरू किए गए हैं। 7वें CPC से जुड़ी पेंशन की अनिवार्य संशोधन से बचने का यह फैसला सरकार के लिए वित्तीय रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इन सेवानिवृत्त समूहों के लिए पेंशन भुगतान की मौजूदा संरचना को बनाए रखता है और IDA-लिंक्ड पेंशन ढांचे से किसी भी विचलन को रोकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशक और हितधारक संबंधित कर्मचारी समूहों द्वारा इस हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ किसी भी संभावित अपील पर नजर रख सकते हैं, जिससे सुप्रीम कोर्ट में आगे कानूनी कार्यवाही हो सकती है। इसके अतिरिक्त, हितधारकों को BSNL और MTNL के चल रहे वित्तीय पुनरुद्धार प्रयासों, ऋण कटौती की जानकारी और परिचालन प्रदर्शन के मैट्रिक्स की निगरानी जारी रखनी चाहिए, क्योंकि ये उनकी व्यावसायिक स्थिरता और सरकारी समर्थन की आवश्यकताओं के प्राथमिक चालक बने हुए हैं।
