दिल्ली की एक कोर्ट ने 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के दौरान अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और कई अन्य लोगों को दोषी करार दिया है। इस मामले में सज़ा पर बहस 23 जुलाई को होगी।
कोर्ट का फैसला: क्या था अपराध?
दिल्ली की कोर्ट ने 2020 के अंकित शर्मा हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत कई लोगों को दोषी पाया है। कोर्ट ने माना कि 25 फरवरी 2020 को चांद बाग पुलिया के पास इकट्ठा हुई भीड़ का इरादा दंगे भड़काने, आगजनी करने और समुदाय विशेष पर हमला करने का था।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि भले ही ताहिर हुसैन ने खुद अंकित शर्मा को चोट नहीं पहुंचाई थी, लेकिन गैर-कानूनी समूह का हिस्सा होने के नाते वह सामूहिक हिंसा के नतीजों के लिए कानूनी रूप से ज़िम्मेदार हैं। ताहिर हुसैन के साथ-साथ नाज़िम, कासिम, जावेद और अनस को भी दोषी ठहराया गया है, जबकि सबूतों के अभाव में छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया।
सबूत और कानूनी प्रक्रिया
कोर्ट ने इस फैसले पर पहुंचने के लिए गवाहों के बयान और सबूतों का मूल्यांकन किया। कोर्ट ने दो पुलिस गवाहों के बयानों को इसलिए नज़रअंदाज कर दिया क्योंकि उनमें विरोधाभास था। इसके बजाय, कोर्ट ने एक स्थानीय गवाह के बयानों पर भरोसा किया, जो कि पहले भी विश्वसनीय माने गए थे, भले ही वह ट्रायल के दौरान थोड़ा पलट गया था। कोर्ट ने बचाव पक्ष की उन दलीलों को भी खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि मामले को गढ़ा गया है या झूठे आरोप लगाए गए हैं।
आरोप और सज़ा का ऐलान
ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण, दंगे भड़काने और समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने जैसे कई आरोपों में दोषी ठहराया गया है। हालांकि, आपराधिक साजिश, उकसाने या लोक उपद्रव फैलाने से संबंधित आरोप साबित नहीं हो सके। अब इस मामले में कोर्ट 23 जुलाई को सज़ा पर बहस सुनेगा, जिसके बाद दोषियों की सज़ा का ऐलान किया जाएगा।
यह मामला 2020 के दंगों से जुड़ी न्यायिक प्रक्रियाओं का एक अहम हिस्सा है, जिसमें कुल 53 लोगों की जान गई थी और भारी तबाही मची थी।
