ओडिशा सरकार ने 1999 के मिशनरी ग्रैहम स्टेंस और उनके दो बच्चों की हत्या के दोषी डेरा सिंह को पैरोल पर रिहा करने पर विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने बताया कि डेरा सिंह की पैरोल अर्जी पर समीक्षा समिति विचार कर रही है। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी।
कोर्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान ओडिशा सरकार ने बताया कि डेरा सिंह, जिसे साल 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्रैहम स्टेंस और उनके दो मासूम बेटों की हत्या का दोषी ठहराया गया था, उसकी पैरोल (Remission) अर्जी पर राज्य की स्क्रीनिंग कमेटी विचार कर रही है। सरकार ने इस मामले में और वक्त मांगा है।
पैरोल का नियम क्या है?
ओडिशा के नियमों के अनुसार, उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों को 25 साल जेल में बिताने के बाद पैरोल पर रिहा करने पर विचार किया जा सकता है। जजों मनोज मिश्रा और विजय बिश्नोई की बेंच ने राज्य सरकार की बात सुनी और मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तारीख तय की है।
डेरा सिंह की याचिका
डेरा सिंह, जिसका असली नाम रवींद्र पाल है, ने जुलाई 2024 में जल्द रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसने अपनी याचिका में कहा है कि वह पहले ही 24 साल जेल में बिता चुका है और उसे आजादी मिलनी चाहिए। 1999 में क्योंझर जिले में हुई इस घटना के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था। जांच में वह उस समूह का मुखिया पाया गया था जिसने ग्रैहम स्टेंस और उनके बेटों फिलिप और टिमोथी की जान ली थी।
पिछली मिसाल
इसी तरह के एक मामले में, अप्रैल 2025 में, इसी घटना में शामिल एक अन्य दोषी महेंद्र हेम्ब्रम को भी 25 साल जेल में बिताने के बाद पैरोल पर रिहा किया गया था। डेरा सिंह का मामला भी अब इसी कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहा है, क्योंकि राज्य सरकार लंबे समय से जेल में बंद कैदियों की सजा में कटौती की समीक्षा कर रही है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि डेरा सिंह की रिहाई का अंतिम फैसला राज्य की प्रशासनिक स्क्रीनिंग कमेटी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। मामले में अगली बड़ी डेवलपमेंट 19 अगस्त को होगी, जब कोर्ट इस पर आगे सुनवाई करेगा।
