दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य की सज़ा-ए-मौत की सुनवाई को फिलहाल टाल दिया है। बचाव पक्ष की दलीलें तैयार करने के अनुरोध के बाद, अगली सुनवाई अब 27 जुलाई को होगी।
Detailed Coverage
सज़ा-ए-मौत पर बचाव पक्ष की दलीलें
दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य सह-दोषियों की सज़ा सुनाने की सुनवाई को फिलहाल टाल दिया है। इस मामले में मूल रूप से इसी हफ़्ते सज़ा सुनाई जानी थी, लेकिन बचाव पक्ष को सज़ा की मात्रा पर अपनी दलीलें तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय देने के उद्देश्य से इसे 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
कोर्ट का निर्देश
एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने सज़ा की सुनवाई को आगे बढ़ाने की यह मोहलत दी है, भले ही उन्होंने यह भी कहा कि सज़ा के मामलों को आम तौर पर बिना किसी अनावश्यक देरी के निपटाया जाना चाहिए। कोर्ट का मानना था कि बचाव पक्ष के अनुरोध को अस्वीकार करने से मुकदमे के इस अंतिम चरण में उन्हें अपना पक्ष पूरी तरह से रखने का मौका नहीं मिल पाता। अगले कदम के तौर पर, जज ने बचाव पक्ष की टीम को पांचों आरोपियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति बताने वाले हलफनामे (affidavits) दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस जानकारी का उद्देश्य अंतिम सज़ा तय करने से पहले कोर्ट को कम करने वाले कारकों (mitigating factors) पर विचार करने में मदद करना है।
मामले की पृष्ठभूमि
ताहिर हुसैन और उसके चार साथियों को 13 जुलाई को IB अधिकारी अंकित शर्मा की मौत के संबंध में दोषी पाया गया था। जांच और बाद की अदालती कार्यवाही में यह निष्कर्ष निकला कि शर्मा की हत्या उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक भीड़ द्वारा हमला किए जाने के दौरान की गई थी। अपने फैसले में, अदालत ने कहा कि हुसैन और अन्य लोग एक अवैध असेंबली का हिस्सा थे जो दंगे और आगजनी में शामिल थी। कोर्ट ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि आरोपियों ने एक सामान्य उद्देश्य के साथ काम किया, जिसके कारण फैसले में वर्णित एक 'क्रूर और निरंतर हमला' हुआ। हिंसा के बाद पीड़ित का शव एक नाले में पाया गया था।
कानूनी संदर्भ
इन दोषसिद्धि में भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत हत्या (धारा 302), अपहरण (धारा 365) और दंगे भड़काने तथा समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने से संबंधित कई गंभीर आरोप शामिल हैं। अभियोजन पक्ष ने सफलतापूर्वक तर्क दिया कि आरोपी जानते थे कि उनके कार्यों से मौत हो सकती है। निवेशक और आम जनता 27 जुलाई की सुनवाई पर नज़र रखेंगे ताकि अंतिम सज़ा के आदेश को देखा जा सके, जो इस विशिष्ट कानूनी प्रक्रिया को समाप्त करेगा।
