दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने के मामले में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी स्थिति साफ कर दी है। सरकार का कहना है कि पब्लिक प्रिविसेस एक्ट के तहत बने कानूनों की वजह से कोर्ट इस इविक्शन (Eviction) यानी खाली कराने की कार्रवाई को रोक नहीं सकता।
Detailed Coverage
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद दिल्ली जिमखाना क्लब के लीज (Lease) एग्रीमेंट से जुड़ा है, जो असल में फरवरी 1928 में साइन हुआ था। सरकार ने 22 मई 2026 को इस लीज को खत्म कर दिया था। सरकार का तर्क है कि पब्लिक पर्पस (Public Purpose) के लिए राज्य को कभी भी प्रॉपर्टी वापस लेने का अधिकार है। लीज खत्म होने के बाद 29 जून 2026 को क्लब को प्रॉपर्टी खाली करने का नोटिस भी जारी किया गया था। सरकार का कहना है कि लीज खत्म होने के बाद क्लब का वहां रुकना कानूनन गलत है।
क्लब मेंबर्स की याचिका
क्लब के 500 से ज्यादा मेंबर्स की ओर से विजय खुराना नाम के एक याचिकाकर्ता ने इस इविक्शन नोटिस को कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि सरकार की ओर से इविक्शन के जो कारण बताए गए हैं, वे काफी अस्पष्ट हैं और इतने पुराने लीज एग्रीमेंट को खत्म करने के लिए काफी नहीं हैं। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि फिलहाल यथास्थिति बनाए रखी जाए ताकि कोर्ट लीज खत्म करने के असली कारणों पर सुनवाई कर सके।
कोर्ट की अगली सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अवनीश झिंगन की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। इस दौरान याचिकाकर्ताओं को जरूरी कागजात दाखिल करने होंगे। केंद्र सरकार ने कोर्ट को यह भी भरोसा दिलाया है कि जब तक यह मामला कोर्ट में चल रहा है, तब तक वे एस्टेट ऑफिसर के सामने इविक्शन की कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाएंगे।
सरकारी पक्ष और आगे क्या?
सरकार ने साफ किया है कि यह कार्रवाई लीज डीड के तहत उनके अधिकार का इस्तेमाल है, न कि किसी प्रॉपर्टी का अनिवार्य अधिग्रहण। अथॉरिटीज ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या क्लब के इंडिविजुअल मेंबर्स को सरकार के कॉन्ट्रैक्टुअल फैसलों को चुनौती देने का कानूनी हक है, क्योंकि वे लीज एग्रीमेंट के डायरेक्ट पार्टी नहीं हैं। अब सबकी नजरें कोर्ट के फैसले पर होंगी कि क्या वह इस मामले में दखल देगा या नहीं, और क्या इविक्शन की कार्रवाई एस्टेट ऑफिसर के पास जारी रह सकेगी।
