कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: जजों पर ऑनलाइन हमलों पर लगेगी लगाम, SOP बनाने का आदेश

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AuthorNeha Patil|Published at:
कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: जजों पर ऑनलाइन हमलों पर लगेगी लगाम, SOP बनाने का आदेश
Overview

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को जजों के खिलाफ ऑनलाइन मानहानि से निपटने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने का आदेश दिया है। यह निर्देश एक ऐसे यूट्यूब वीडियो के बाद आया है जिसमें एक प्रमुख हिंदू साधु से जुड़े बलात्कार के आरोपों के मामले में अदालत के कामकाज पर कथित तौर पर निराधार दावे किए गए थे। अदालत का लक्ष्य इसे 'जानबूझकर की गई टिप्पणियों' से अपनी गरिमा की रक्षा करना है।

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न्यायिक गरिमा पर उठा सवाल

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने जजों को ऑनलाइन हमलों से बचाने के लिए एक निर्णायक कदम उठाया है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक ठोस मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) स्थापित करने का आदेश दिया है। यह आदेश 21 मई को जारी किया गया, जब कोर्ट ने एक यूट्यूब वीडियो देखा जिसमें जस्टिस जय सेनगुप्ता के अनुसार, न्यायपालिका के खिलाफ "जानबूझकर अपमान" किया गया था। जांच के दायरे में आए मामले में पद्मश्री से सम्मानित और कार्तिक महाराज के नाम से जाने जाने वाले स्वामी प्रदीपतानंद के खिलाफ बलात्कार के आरोपों को रद्द करने की याचिका शामिल थी।

'जानबूझकर की गई टिप्पणियों' से बचाव

कोर्ट ने जजों को निशाना बनाने वाले आरोपों और "मानहानिकारक और जानबूझकर की गई टिप्पणियों" पर गहरी चिंता व्यक्त की, भले ही अदालत सत्र में न हो। इन घटनाओं और अन्य "बहुत परेशान करने वाले" वीडियो ने कोर्ट को इस तरह की कथित मानहानि से निपटने और न्यायिक कार्यवाही की पवित्रता की रक्षा के लिए एक औपचारिक तंत्र की तलाश करने के लिए प्रेरित किया है। इस कदम का उद्देश्य सोशल मीडिया के माध्यम से न्यायिक निष्पक्षता को कमजोर करने के प्रयासों को रोकना है।

बलात्कार के आरोप

इस न्यायिक निर्देश को प्रेरित करने वाले मामले में 2013 से गंभीर आरोप शामिल हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि स्वामी प्रदीपतानंद ने भारत सेवाश्रम संघ से संबद्ध एक स्कूल में शिक्षण पद का वादा करने के बाद कथित तौर पर बार-बार बलात्कार किया। पीड़िता ने उस पर जबरन गर्भपात और आपराधिक धमकी देने का भी आरोप लगाया है। स्वामी प्रदीपतानंद की याचिका इन आरोपों से इनकार करती है, और दावा करती है कि उसे राज्य सरकार के भीतर राजनीतिक ताकतों द्वारा निशाना बनाया गया है।

कानूनी कार्यवाही और अगली तारीख

इससे पहले, स्वामी प्रदीपतानंद ने इन-कैमरा कार्यवाही का अनुरोध किया था, जिसमें ऐसे वीडियो का हवाला दिया गया था जिनके बारे में उनका मानना था कि वे उनके और उनके मामले की सुनवाई करने वाले जजों दोनों को निशाना बनाते हैं। हाई कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 22 जून तय की है, जहां SOP और मूल आरोपों के संबंध में आगे के विकास की उम्मीद है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.