TMC के ₹440 करोड़ फ्रीज! कलकत्ता HC ने ED जांच के बीच खातों पर लगाया रोक

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
TMC के ₹440 करोड़ फ्रीज! कलकत्ता HC ने ED जांच के बीच खातों पर लगाया रोक

कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए गए ₹440.42 करोड़ वाले तीन बैंक खातों तक पहुंचने से इनकार कर दिया है। ये फंड कथित मनी लॉन्ड्रिंग और प्राइवेट एविएशन कंपनियों से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की जांच के दायरे में हैं। कोर्ट के इस आदेश से कानूनी जांच जारी रहने तक पार्टी इन खातों का संचालन नहीं कर पाएगी।

TMC के ₹440 करोड़ फ्रीज, कोर्ट ने ED की जांच को हरी झंडी दी

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खातों में जमा ₹440.42 करोड़ की राशि पर लगी रोक को बरकरार रखा है। कोर्ट ने पार्टी की अंतरिम राहत की अर्जी को खारिज कर दिया, जिसके तहत वे प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा वित्तीय अनियमितताओं की जांच जारी रहने के दौरान इन फंड्स तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे थे।

मनी लॉन्ड्रिंग और फंड डायवर्जन का आरोप

ED इस समय कथित अवैध धन वसूली और पार्टी के खातों के माध्यम से फंड के हस्तांतरण की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच हुए लेनदेन का पता चला है। इस अवधि के दौरान, लगभग ₹160 करोड़ कथित तौर पर TMC खातों से Carewell Aviation India Pvt Ltd और संबंधित फर्मों को ट्रांसफर किए गए थे।

ED की आगे की विश्लेषण से पता चला कि Carewell Aviation से लगभग ₹82.96 करोड़ बाद में एक नई कंपनी को ट्रांसफर किए गए। एजेंसी का आरोप है कि इन रीडायरेक्ट किए गए फंड का एक बड़ा हिस्सा उच्च-मूल्य वाली संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया गया, विशेष रूप से एक Embraer Legacy 600 बिजनेस जेट और एक AgustaWestland 109SP हेलीकॉप्टर। कोर्ट ने 13 जुलाई को एजेंसी और पार्टी के कानूनी प्रतिनिधियों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

कानूनी और वित्तीय असर

इस कोर्ट के आदेश का मतलब है कि इन विशेष खातों में रखी गई बड़ी राशि राजनीतिक दल के लिए जांच की अवधि के दौरान पहुंच से बाहर रहेगी। इतनी बड़ी राशि का फ्रीज होना संगठन के संचालन के लिए तत्काल तरलता की कमी पैदा करता है, क्योंकि वे इन फंडों का उपयोग दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों या किसी भी नियोजित व्यय के लिए नहीं कर सकते हैं।

यह मामला भारत में राजनीतिक संस्थाओं के वित्तीय व्यवहारों पर बढ़ते नियामक जांच को उजागर करता है, विशेष रूप से शेल कंपनियों के उपयोग और उच्च-मूल्य वाली संपत्ति अधिग्रहण के संबंध में। राजनीतिक परिदृश्य के निवेशक और पर्यवेक्षक अक्सर ऐसे विकासों पर नजर रखते हैं क्योंकि ये व्यापक शासन संबंधी प्रश्न और शामिल पार्टियों के लिए संभावित दीर्घकालिक कानूनी जोखिम पैदा कर सकते हैं। कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण ED द्वारा साक्ष्य की निरंतर प्रस्तुति होगी, और अदालत अंततः मनी लॉन्ड्रिंग जांच के निष्कर्षों के आधार पर फ्रीज की गई संपत्तियों की अंतिम स्थिति पर निर्णय लेगी।

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