Kalshi पर राज्यों की कार्रवाई पर CFTC का ब्रेक, रेगुलेटरी जंग का बिगुल फूंका

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AuthorNeha Patil|Published at:
Kalshi पर राज्यों की कार्रवाई पर CFTC का ब्रेक, रेगुलेटरी जंग का बिगुल फूंका
Overview

अमेरिका की कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) ने Prediction Market प्लेटफॉर्म Kalshi को राज्यों द्वारा की जा रही कानूनी कार्रवाई से बचा लिया है। CFTC ने एक कोर्ट ऑर्डर के जरिए Arizona में Kalshi के खिलाफ आपराधिक मामले को रोक दिया है। यह कदम राज्यों की इन प्लेटफॉर्म्स को गैरकानूनी जुआ (Illegal Gambling) बताने की कोशिशों को एक बड़ा झटका है और फेडरल अथॉरिटी का दावा पेश करता है।

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रेगुलेटरी अधिकार का बड़ा टकराव

CFTC, न्याय विभाग (Department of Justice) के साथ मिलकर Arizona, Connecticut और Illinois जैसे राज्यों के खिलाफ खड़ी हो गई है। CFTC का कहना है कि इवेंट कॉन्ट्रैक्ट्स (Event Contracts) और Prediction Markets पर उसका ही एक्सक्लूसिव अधिकार है। CFTC के चेयरमैन Michael S. Selig ने राज्यों के इस कदम को "अधिकारों का हनन" (Overreach) बताया और कहा कि इससे एक खतरनाक मिसाल कायम होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस हमेशा से ही इन वित्तीय साधनों (Financial Instruments) के लिए राज्य-दर-राज्य अलग-अलग नियमों के खिलाफ रही है। CFTC का तर्क है कि ये इवेंट कॉन्ट्रैक्ट्स कमोडिटी एक्सचेंज एक्ट (CEA) के तहत "स्वैप" (Swaps) की श्रेणी में आते हैं। इस कानूनी रुख का मकसद रेगुलेशन को संघीय स्तर पर एक करना और राज्यों की उन कोशिशों को चुनौती देना है जो इन बाजारों को अवैध जुआ मानती हैं।

कानूनी चुनौतियों के बीच Kalshi का विकास

Kalshi, जिसे CFTC द्वारा एक डेजिग्नेटेड कॉन्ट्रैक्ट मार्केट (DCM) के तौर पर रेगुलेट किया जाता है, इस नियामक संघर्ष के केंद्र में है। कंपनी ने हाल ही में एक फंडिंग राउंड में $22 बिलियन का वैल्यूएशन हासिल किया है, जो निवेशकों का भरोसा दर्शाता है, भले ही यह कानूनी विवादों से घिरी हुई हो। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साप्ताहिक ट्रेडिंग वॉल्यूम $1 बिलियन से अधिक है, जो इस सेक्टर के तेजी से विस्तार का संकेत है। ग्लोबल प्रेडिक्शन मार्केट्स के $1 ट्रिलियन सालाना तक पहुंचने का अनुमान है। कॉम्पिटिटर Polymarket ने भी बड़ा निवेश आकर्षित किया है। Kalshi फिएट करेंसी का उपयोग करता है और KYC (Know Your Customer) चेक की आवश्यकता होती है, जबकि Polymarket क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करता है। नियामक माहौल जटिल बना हुआ है। हाल ही में एक अदालत ने CFTC के अधिकार की पुष्टि की है, लेकिन अन्य कानूनी लड़ाइयां अभी भी जारी हैं।

जोखिम और भविष्य की राह

CFTC के हस्तक्षेप के बावजूद, Kalshi जैसे प्रेडिक्शन मार्केट ऑपरेटर्स के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। इनसाइडर ट्रेडिंग और मार्केट मैनिपुलेशन (Market Manipulation) की चिंताएं बढ़ रही हैं। लॉमेकर्स offshore प्लेटफॉर्म्स पर CFTC की निगरानी पर सवाल उठा रहे हैं। SEC (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन) ने भी कुछ इवेंट कॉन्ट्रैक्ट्स को संभावित सिक्योरिटीज के रूप में देखने के संकेत दिए हैं। कानूनी लड़ाइयां अभी खत्म नहीं हुई हैं। जबकि एक अदालत ने Kalshi के पक्ष में फैसला सुनाया है, एक विरोधी फैसले से मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है। एक नया प्रस्तावित कानून "Prediction Markets Are Gambling Act" रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को बदल सकता है। एक क्लास एक्शन मुकदमा भी Kalshi पर राज्य जुआ कानूनों के उल्लंघन और ग्राहकों को गुमराह करने का आरोप लगाता है।

CFTC का अगला कदम

Chairman Selig, जो "न्यूनतम प्रभावी रेगुलेशन" के पक्षधर हैं, प्रेडिक्शन मार्केट्स के लिए सटीक रेगुलेटरी सीमाओं पर चल रहे मुकदमेबाजी पर निर्भर हैं। हालांकि, CFTC की हालिया एडवांस्ड नोटिस ऑफ प्रपोज्ड रूलमेकिंग (ANPRM) प्रेडिक्शन मार्केट्स के लिए अपने रेगुलेटरी ढांचे को औपचारिक बनाने का संकेत देती है। यह कोर प्रिंसिपल्स, संभावित वर्जित कॉन्ट्रैक्ट्स और लागत-लाभ पर सार्वजनिक टिप्पणी मांगेगा। यह दोहरा दृष्टिकोण दर्शाता है: राज्यों के अतिक्रमण के खिलाफ अपने अधिकार का बचाव करना और साथ ही प्रेडिक्शन मार्केट्स के संचालन नियमों को परिभाषित करने की तैयारी करना।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.