कानूनी प्रक्रिया का हुआ दुरूपयोग: कोर्ट
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बिल्डर संजय पुनमिया द्वारा स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर शेखर जगताप और पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय पांडे के खिलाफ दर्ज की गई दो FIRs को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ये मामले द्वेषपूर्ण इरादे से दायर किए गए थे और इनमें कोई कानूनी आधार नहीं था। कोर्ट ने इन FIRs को 'कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरूपयोग' करार दिया।
क्या थे आरोप?
एक FIR, जो 2024 में कोलाबा पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई थी, में जगताप पर फर्जी नियुक्ति आदेशों का इस्तेमाल करके स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर बनने का आरोप था। यह आरोप लगाया गया था कि जगताप ने पुनमिया की कस्टडी और जमानत याचिकाओं को प्रभावित करने की कोशिश की। हालांकि, इस मामले में पुलिस पहले ही क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर चुकी थी।
दूसरी FIR, जिसे ठाणे नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, में जगताप, पांडे और अन्य अधिकारियों पर तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को हटाने और उनके खिलाफ झूठे सबूत गढ़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। पुनमिया का यह भी दावा था कि उनके खिलाफ एक पुराना केस दोबारा खोला गया था और जगताप ने उनकी जमानत खारिज करवाने में भूमिका निभाई।
कोर्ट ने क्यों खारिज किए केस?
कोर्ट ने जगताप की नियुक्ति से संबंधित तमाम सरकारी दस्तावेजों, वरिष्ठ अधिकारियों की सिफारिशों और तत्कालीन गृह मंत्री दिलीप वाल्से-पाटिल के पत्र का हवाला देते हुए इन साजिश के आरोपों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि एक नियुक्ति आदेश की अनुपस्थिति, दर्जनों सरकारी रिकॉर्ड पर भारी नहीं पड़ सकती।
संजय पांडे के मामले में, हाई कोर्ट को उनके खिलाफ कोई भी विश्वसनीय आरोप नहीं मिले। MCOCA केस को CID में ट्रांसफर करने का आरोप भी निराधार पाया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता पुनमिया बार-बार ऐसे ही मामले लेकर आते रहे हैं और उनके खिलाफ पहले भी अवमानना की कार्यवाही चल चुकी है। कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाने की मांग को भी ठुकरा दिया।
