बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे की जमानत याचिका खारिज कर दी है। म्हात्रे पर एक नगर निगम अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट का आरोप है। कोर्ट ने उम्र के आधार पर दी जाने वाली नरमी की दलीलों को खारिज कर दिया, साथ ही घटना के वीडियो सबूतों का भी हवाला दिया।
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कोर्ट का अहम फैसला: जमानत अर्जी खारिज
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे को राहत देने से इनकार कर दिया है। म्हात्रे पर कल्याण डोंबिवली नगर निगम (KDMC) द्वारा संचालित शास्त्री नगर अस्पताल में मेडिकल स्टाफ पर हमले का आरोप है। यह घटना 6 जुलाई, 2026 को हुई थी।
जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम ए. अंखाड की बेंच ने म्हात्रे के वकील की दलीलों को खारिज कर दिया, जिसमें 73 वर्षीय कॉर्पोरेटर की उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देकर नरमी की गुहार लगाई गई थी। कोर्ट ने घटना के सीसीटीवी फुटेज का जिक्र करते हुए कहा कि वीडियो में म्हात्रे काफी फुर्तीले दिख रहे थे, जो उनकी शारीरिक हालत के आधार पर नरमी की दलील को कमजोर करता है।
कानूनी प्रक्रिया और सबूत संरक्षण
कोर्ट ने इस मामले में अहम कानूनी निर्देश जारी किए हैं। महाराष्ट्र सरकार को ठाणे सिविल अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। साथ ही, KDMC के शास्त्री नगर अस्पताल को भी 6 जुलाई की शाम के रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। म्हात्रे को 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले निचली अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए उस आदेश को रद्द कर दिया और म्हात्रे को सरेंडर करने का आदेश दिया था।
मेडिकल स्टाफ पर असर और IMA की भूमिका
इस घटना का अस्पताल के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले के शिकार हुए दो डॉक्टर, डॉ. वैभव सालुंखे और रेजीडेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. सृष्टि बाविसकर, कथित तौर पर मानसिक आघात के कारण इस्तीफा दे चुके हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने प्रभावित डॉक्टरों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए कानूनी कार्यवाही में औपचारिक रूप से हस्तक्षेप किया है। कोर्ट का मुख्य ध्यान सबूतों की सत्यनिष्ठा और न्यायिक प्रक्रिया पर बना हुआ है, और म्हात्रे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
